हिंदू कोड - जारी - Page 109

94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कदम उठायें। ऐसे भी मामले होंगे जो दोनों ओर से अंतिम चरण में होंगे तथा मेरा विश्वास है कि बहुत से मामलों में कठिनाइयां हैं परन्तु हम इनसे बच नहीं सकते हैं। इस संहिता को पारित करने के बाद भी ऐसे मामले हो सकते हैं, मैं एक बार फिर इस बात पर बल देता हूँ कि ‘गोद लेना’ एक बहुत ही पुरानी परम्परा है और यह हमारे लिए जरूरी है। यदि इस संहिता को पारित भी कर दिया जाता है, तो भी हम इन्हें नहीं छोड़ सकते हैं।

जिस तीसरी बात पर मुझे आपत्ति है, वह है उत्तराधिकार। जैसा कि कुछ मिनट पहले मैंने कहा था, मैं लड़कियों को हिस्सा देने के पक्ष में नहीं हूँ। इसके बजाए, मेरा यह मत है कि यह भेद केवल लिंग के आधार पर है कि उसे बराबर का हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। यह कहा गया था कि यह केवल लिंग के आधार पर ही नहीं है। परन्तु मैं समझता हूँ कि उसे केवल लिंग के आधार पर ही अपने भाई के साथ बराबर हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। अन्यथा एक ही माता-पिता की संतान होने के नाते, केवल पुत्री को हिस्सा न देने का कोई भी कारण नहीं है। मैं पूछता हूँ कि उसे बराबर का हिस्सा क्यों नहीं दिया जाना चाहिए। मुझे इस पर आपत्ति नहीं है। पिछली बार, शायद 14 दिसम्बर, 1949 को मैंने कहा था कि मैं यह चाहूँगा कि उसे तब तक अपने पिता की सम्पत्ति में समान हिस्सा मिलना चाहिए जब तक कि वह अविवाहित हो तथा जैसे ही उसका विवाह हो जाता है, उसे अपने पति अथवा ससुर की सम्पत्ति से बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए। उसे हिस्सा अवश्य मिलना चाहिए। इससे वर्तमान समाज और व्यवस्था पर प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। हमारी विशेष परिस्थितियाँ हैं, मैं आशा करता हूँ कि यह संहिता भूमि पर लागू नहीं होगा बल्कि कतिपय....

पंडित एम. बी. भार्गव (अजमेर) : अब होगा, आधिकारिक संशोधन प्रस्तुत हो

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गया है।

सरदार हुकम सिंह : महोदय, पंजाब राज्य में छोटी-छोटी जोत भूमि है। वे पहले ही अलाभप्रद हैं। दूसरी बात यह है कि हमारे यहाँ पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या बहुत ही कम है।

डॉ. अम्बेडकर : इसलिए, उनका मूल्य अधिक है।

सरदार हुकम सिंह : जी, हाँ। आप उनका मूल्य बढ़ाने जा रहे हैं। परन्तु अन्य चीजों की ओर नहीं देख रहे है। उस कीमत को समायोजित किया जा सकता है। मैंने पहले ही कहा है कि उनकी संख्या बहुत ही कम है। यह सर्वविदित है कि कुछ समय पहले लोगों को यह पसंद नहीं था कि वे दामाद बनाएं। वहां महिला शिशु हत्यायें हुईं। मैं बहस के रूप में नहीं बल्कि ईमानदारी से बताता हूँ कि इससे आप