हिंदू कोड - जारी - Page 111

96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्रीमती दुर्गाबाई (मद्रास) : महोदय, क्या मैं एक प्रश्न पूछ सकती हूँ?

माननीय अध्यक्ष : वास्तव में यदि हम सब मामले पर विचार करना चाहते हैं तो सदस्य को बिना व्यवधान के बोलते देना बेहतर होगा। मैं सभी माननीय सदस्यों से साग्रह निवेदन करूंगा कि वे प्रश्न पूछने के बजाय सभा के समक्ष रखे गये मुद्दों और तर्कों पर अधिक ध्यान दें, बेहतर यही होगा कि माननीय सदस्य इन सज्जन के विचार सुनें और उसके बाद अपने तर्क रखें, मैं सभी बोलने वाले सदस्यों को पूरा अवसर दूँगा।

श्रीमती दुर्गाबाई : मैं केवल एक प्रश्न पूछ रही हूँ।

माननीय अध्यक्ष : चाहे कुछ भी हो, हमें सदस्यों को बोलने का अवसर देना चाहिए। अन्यथा, मैं देख रहा हूँ कि बीच में इस तरह के व्यवधान तथा उत्तर प्राप्त करने के प्रयास हो रहे हैं। मेरी अपील के बावजूद बीच में कई बार व्यवधान हो रहा है जिसके परिणामस्वरूप, केवल वक्ता का तर्क ही नहीं भंग होता है बल्कि अधिक समय खर्च होता है। मेरे विचार से चर्चा की गम्भीरता समाप्त हो जाती है। हम यहां एक विशेष मामले पर विधान बना रहे हैं, इसलिए हमें छींटाकशी करने अथवा प्रश्न पूछने के बजाय प्रत्येक सदस्य की बात को ध्यानपूर्वक और गम्भीरता से सुनना चाहिए। हमें वक्ता के साथ धैर्य धारण करना चाहिए।

सरदार हुकम सिंह : महोदय, मैं अपने अंतिम मुद्दे पर आता हूँ, और यह अत्यधिक दुखदायी है। मैं सदन के ध्यान में यह बात लाना चाहता हूँ कि सिखों के मन में पहले से ही कुछ शंकाएँ हैं; कुछ कह सकते हैं कि वे आधारहीन हैं। चाहे जो कुछ भी हो, हमारी शंका यह है कि सिखों को इसमें शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है क्या उनकी परम्पराओं और संस्कृति को नष्ट करने का काम हो रहा है।.... अनेक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं!

सरदार हुकम सिंह : रीतियों और रिवाजों को उनके पास भी इस के कतिपय आधार हैं। उन्होंने हमेशा यह शिकायत की है कि उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया है। उन्होंने एक उदाहरण यह दिया है कि जब यह घोषणा की जा रही थी कि वे हिंदुओं के अभिन्न अंग हैं तथा जब राष्ट्रपति को अनुसूचित जातियों के बारे में एक आदेश जारी करना पड़ा था तो उन्हें दरकिनार कर दिया गया, राष्ट्रपति द्वारा हाल ही में जारी आदेश के अंतर्गत 34 जातियों को अनुसूचित जातियां घोषित कर दिया गया है। बशर्तें वे हिंदू धर्म अपनाएं। केवल चार ‘‘ जातियां ही ऐसी थीं जिन्हें सुरक्षा की शर्त पर अनुसूचित जातियों में रखा गया, बशर्तें के हिंदू धर्म अथवा