हिंदू कोड - जारी - Page 113

98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हिंदू समाज की रचना ऐसी है कि कई लोग हिंदू होते हुए भी उस धर्मशास्त्री अर्थ में हिंदू धर्म नहीं मानते। जिस अर्थ में ‘‘प्रोफेस (धर्म मानना)’’ शब्द का प्रयोग किया गया है। पहले कोई भी कलकत्ता में ब्रह्म समाज अपनाने वालों का तथा बम्बई में प्रार्थना समाज अपनाने वालों का उदाहरण दे सकता था। ये दोनों सम्प्रदाय हिंदू समुदाय से ही निकलकर बने थे तथा इन्होंने खुले आम कहा था कि वे हिंदू धर्म को नहीं मानते हैं। जैसा कि मेरे मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव ने कहा, आज भी कई हिंदू ऐसे हैं जो, जहाँ तक धर्म का संबंध है, विभिन्न धर्मों की अच्छी-अच्छी बातें अपनाना पसंद करते हैं। जिस धर्म में उन्हें जो अच्छा लगे, उसे वे अपना लेते हैं। चाहे उन्हें अपने पूर्वजों का धर्म ही क्यों न छोड़ना पड़े। इसलिए यदि ‘‘प्रोफेस’’ शब्द इस प्रकरण में रहा तो कोई भी स्वतंत्र होकर यह तर्क दे सकता है कि जब तक यह सिद्ध नहीं हो जाता है कि कोई विशेष व्यक्ति हिंदू धर्म को मान रहा है तब तक यह संहिता उस पर लागू नहीं होगी। निश्चित तौर पर, यह इस संहिता का उद्देश्य नहीं है, संहिता का उद्देश्य यह है कि इसे उन सभी व्यक्तियों पर लागू किया जाना चाहिए जो हिंदू धर्म को मानते हैं। मैं इसी शब्दावली के प्रयोग पर जोर दूँगा ताकि ‘‘प्रोफेस’’ शब्द पर आधारित आपत्ति को दूर किया जा सके। इसलिए, मैं उसे हटाने का प्रस्ताव करता हूँ।

मेरा दूसरा संशोधन खंड (घ) है। खंड (घ) कहता है कि यह संहिता किसी अन्य धर्म से हिंदू धर्म अपनाने वाले व्यक्ति पर लागू होगी, जैसा कि सदन को ज्ञात है हम ‘‘हिंदू धर्म’’ शब्दों को व्यापक अर्थ में लागू कर रहे हैं तथा उसे उस सीमित अर्थ में प्रयोग नहीं कर रहे हैं। जिसमें यह उस व्यक्ति पर ही लागू होगा जो वेदों में, वेदों की अमोघता में, सम्भवतः चतुर्वर्णों में, यज्ञों के आयोजन और इसकी पवित्रता में मोक्ष के एक माध्यम के रूप में विश्वास रखता है। हम इस शब्द को व्यापक अर्थ में प्रयोग कर रहे हैं ताकि बौद्धों, जैनियों, सिखों इत्यादि जो इन मतों में विश्वास नहीं रखते हैं, को भी शामिल किया जा सके। इसके परिणामस्वरूप पश्चिम खण्ड (घ) ऐसा ही रहा तो इसमें धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति का अर्थ होगा, केवल हिंदू धर्म अपनाना और इसका सीमित अर्थ ही है। इसलिए मैं एक नई शब्दावली ‘‘हिंदू धर्म, बौद्ध-धर्म.... इत्यादि को अपनाने वाले’’ को प्रयोग करने का प्रस्ताव करता हूँ।

मेरा तीसरा संशोधन उप-खंड (4) को हटाने से संबंधित है। जैसा कि सदन को ज्ञात है। यह खंड प्रथम वाचन के समय सदन में प्रस्तुत मूल विधेयक में नहीं था यह खंड प्रचार समिति की कार्यवाही के दौरान शामिल किया गया था। इस खंड को प्रायोजित करने वाले सदस्यों का यह विचार था कि चूँकि इस विधेयक का उद्देश्य सभी हिंदू वर्ग के लोगों को इस संहिता के दायरे में लाने का है तो उन हिंदुओं को