हिंदू कोड - जारी - Page 115

100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चुनाव अथवा इसी तरह की किसी प्रक्रिया के बाद किये जाने वाले जनमत संग्रह के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए।

पंडित एम. बी. भार्गव : वह बाद में आता है।

डॉ. अम्बेडकर : किसी ने कहा, मुझे उसका नाम याद नहीं है।

श्री जे. आर. कपूर : वह बाद में ऐसा कहना चाहते हैं। डॉ. अम्बेडकर : हाँ।

मुझे यह देखकर बहुत आश्चर्य है कि कुछ सदस्य जो कल तक इस संहिता के सबसे बड़े विरोधी थे तथा आज तक प्रचलित पुराने हिंदू कानून के समर्थक थे, वे आज आगे आकर यह कह रहे हैं कि वे अब अखिल भारतीय नागरिक संहिता के लिए तैयार हैं। एक कहावत है कि तेंदुआ अपना स्वभाव नहीं बदल सकता है और मुझे विश्वास नहीं होता है कि ये तेंदुए जो हर समय इस विधेयक पर झपट रहे हैं, अचानक ही अपना मन बदल देते हैं तथा नई संहिता को स्वीकार करने का साहसिक कदम उठाते हैं। यदि वे नागरिक संहिता चाहते हैं, तो क्या वे सोचते हैं कि नागरिक संहिता लागू करने में लम्बा समय लगेगा? सम्भवतः उनके सुझाव का यही उद्देश्य है। जैसा कि हिंदू संहिता का प्रारूप बनाने में चार-वर्ष लग गये हैं, उन्हें नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने में कम से कम 10 वर्ष लग जायेंगे, मैं कहना चाहता हूँ कि हमारे पास जो नागरिक संहिता है उसे, यदि वे चाहते हैं, इस सदन में दो दिनों के भीतर प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि वे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार और इच्छुक हैं तो हम उसे आधे घंटे के भीतर ही सदन में पारित कर सकते हैं।

मैं पूछता हूँ कि नागरिक संहिता क्या है? भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम ही नागरिक संहिता है। दुर्भाग्यवश यह हिंदुओं पर लागू नहीं होता है। मैं नहीं जानता कि कानून की अधिकतम जानकारी रखने वाला ऐसा कोई व्यक्ति है जो भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम से बेहतर नागरिक संहिता तैयार कर सके। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम को सभी पर लागू करने के लिए यह जरूरी होगा कि इस अधिनियम में एक और खंड जोड़ा जाए कि खंड 2 में निहित शब्दों अर्थात् ‘यह हिंदुओं पर लागू नहीं होगा।’ को हटाया जाये तभी आप नागरिक संहिता कल ही तैयार कर सकते हैं। यदि आप नागरिक संहिता के एक हिस्से के रूप में विवाह कानून चाहते हैं, तो इसका भी प्रारूप तैयार है। विशेष विवाह अधिनियम तो है ही। आपको केवल ‘‘यह इस पर अथवा उस पर लागू नहीं होगा’’ शब्दों को ही हटाना है। खंड 2 में आपको इतना ही कहना है कि यह सभी नागरिकों पर लागू होगा और यह मामला यहीं पर समाप्त हो जाता है। मैं यह जानना चाहता हूँ कि जिन्होंने भी