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यह सुझाव दिया है, उन्होंने एक गम्भीर नीयत से तथा वास्तव में एक अच्छा कानून लागू करने के उद्देश्य से दिया होगा।
श्री सोंघी (पंजाब) : उनकी बात मान लीजिए।
डॉ. अम्बेडकर : मैं ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हूँ क्योंकि मैं उन्हें अच्छी तरह से जानता हूँ। इसीलिए कल मैंने अपने मित्र श्री रोहिणी कुमार चौधरी का सुझाव स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘आज जो भी लागू करना चाहे, लागू करो, या तो आप संहिता लाओ और यदि नहीं पारित करा सकते तो इसे यहीं समाप्त कर दो,’’ मैंने उनकी बातों को मान लिया होता यदि मैंने उन पर विश्वास कर लिया होता कि मेरे द्वारा उनके सुझाव को मान लेने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। अब मैं देखता हूँ कि वह एकदम अकेले पड़ गये हैं। उनके कुछ मित्र जो उनके साथ चल रहे थे तथा उनके पीछे एक मजबूत दीवार की तरह खड़े थे, उन्हें छोड़कर चले गये हैं। उन्हें समझ में आ गया है तथा वे इस विधेयक को पूर्णतः न सही अपितु अंशतः समर्थन देने के लिए तैयार हैं। इसलिए इस नागरिक संहिता को लागू करने का विचार मुझे अच्छा नहीं लगता, क्योंकि मेरे ख्याल से इस पर न तो पूर्ण समर्थन मिल रहा है और ना ही कोई इस विषय में गम्भीर है।
जहाँ तक इस दलील का प्रश्न है कि इस संहिता को सभी नागरिकों पर लागू किया जाना चाहिए, मेरे विचार से पंडित ठाकुर दास भार्गव ने उन सभी आलोचकों को जवाब दे दिया है जिन्होंने यह सुझाव दिया है। मैं नहीं समझता हूँ कि मैं इस विषय पर कुछ और बोल सकता हूँ, मैं नहीं जानता कि जिन लोगों ने यह सुझाव दिया हैं, उन्हें इतना अनभिज्ञ : मैं तो मूर्ख तक कहने जा रहा था : समझा जाये कि वे इस देश में विभिन्न समुदायों की भावनाओं को महसूस नहीं करते हैं। यह कहना ठीक है कि हमने अपने संविधान में एक पंथ-निरपेक्ष राष्ट्र का प्रस्ताव किया है। मुझे इस बात का ज्ञान नहीं है कि जब कोई सदस्य ‘‘पंथ निरपेक्ष राष्ट्र शब्द प्रयोग करता है तो उनके कहने का अर्थ वही है, जैसा कि संविधान में कहा गया है। इसका यह अर्थ नहीं है कि हम धर्म को समाप्त कर सकते हैं अथवा हम लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में नहीं रखेंगे। एक पंथ निरपेक्ष राष्ट्र का अर्थ यह है कि यह संकट शेष लोगों पर कोई विशेष धर्म थोपने के लिए सक्षम नहीं होगी। संविधान इसी सीमा को मान्यता देता है। हम यहाँ लोगों की भावनाओं का मजाक उड़ाने के लिए नहीं बैठे हैं।
बाबू रामनारायण सिंह : आप ऐसा कह रहे हैं।
डॉ. अम्बेडकर : मैं आपको बताऊंगा कि मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ। मुझे लगता है कि यह एक ऐसा सुझाव है जिसमें साधारण समझ की कमी है तथा मैं इस पर बोलना नहीं चाहता हूँ।