हिंदू कोड - जारी - Page 120

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यदि इसमें कहा जाता है कि यह उन पर भी लागू होता है तो किस सीमा तक। सभी जानते हैं कि इस देश में आदि द्रविड़, आदिवासी, जंगली जनजातियाँ, पिछड़े वर्ग, विश्वात्मा में विश्वास करने वाले तथा अन्य लोगों की संख्या बहुत अधिक है। उनके बारे में क्या विचार है? उनके लिए भी निश्चित रूप से कोई प्रावधान होना चाहिए। इसलिए उप-खंड (2) उस वर्ग के लोगों पर लागू होता है जिन्हें मैंने शेष वर्ग कहा है। अब यह कहा जा सकता है कि इस विधेयक को बनाने में सरकार की राजनीतिक मंशा है अर्थात् पिछले दरवाजे से अनजान लोगों को हिंदू समाज में शामिल करने की मंशा है। 4.00 बजे।

यह हमारा उद्देश्य कतई नहीं है। आप हमारे द्वारा तैयार किये जा रहे परन्तुक से देखोगे कि हिंदू संहिता उन पर तभी लागू होगा, यदि यह साबित हो जाता है कि उस वर्ग में हिंदू परम्परायें और रीति - रिवाज प्रचलित हैं। अन्यथा वे अपनी इच्छा से चलने के लिए मुक्त हैं। यहाँ पर भी मेरे मित्र की आलोचना तर्कहीन थी।

प्रो. रंगा : क्या वे इससे बाहर जा सकते हैं?

डॉ. अम्बेडकर : एक बार वे परम्पराओं आदि को अपना लेते हैं तो वे शामिल

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समझे जायेंगे, अन्यथा वे बाहर ही हैं।

महोदय, अब मैं उन कुछ मुद्दों पर बोलूँगा, जो मेरे मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव और सरदार हुकम सिंह द्वारा उठाये गये थे। सरदार हुकम सिंह का संशोधन यह है कि यह संहिता सिखों पर लागू नहीं होनी चाहिए। मेरे ख्याल से बाद में उन्होंने अपना रुख थोड़ा नरम किया और कहा कि उन्हें कुछ भागों पर ही आपत्ति है। जहाँ तक इस विधेयक को हिंदुओं के अलावा अन्य व्यक्तियों अथवा समुदायों पर लागू करने का प्रश्न है, मैं समझता हूँ कि इस मामले पर आम विचार करना वांछनीय होगा। पहली बात जिस पर मैं बल देना चाहूँगा तथा यह अपेक्षा करूंगा कि संसद सदस्य इस पर ध्यान दें, यह है कि सामाजिक दृष्टि से भारत और अन्यत्र में जो विभिन्न धर्म हैं, वे दो श्रेणियों में आते हैं। कुछ धर्म ऐसे हैं जो कानूनी व्यवस्था से जुड़े हैं और आप उन धर्मों से अलग नहीं हो सकते हैं, दूसरी ओर, कुछ धर्मों में कानूनी व्यवस्था नहीं है, जो केवल स्वीकृत मात्र हैं। मैं समझता हूँ कि हिंदू धर्म की विशेषता यह है कि इसका कानूनी ढांचा है जो इससे पूर्णतः जुड़ा हुआ है। इस बात को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। यदि किसी को इसकी सही समझ है तो उसे यह समझने में कोई कठिनाई नहीं होगी कि क्यों सिखों, जैनियों और बौद्धों को हिंदू धर्म में शामिल किया गया है। जब बुद्ध ने वैदिक ब्राह्मणों से अलग मत व्यक्ति किया तो उनके मत-भेद मन तक ही सीमित थे, बुद्ध ने अपने अनुयायियों के लिए कोई पृथक कानूनी प्रणाली