106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रतिपादित नहीं की; उन्होंने कानूनी व्यवस्था को वहीं छोड़ दिया था। यह हो सकता है कि उस समय प्रचलित कानूनी व्यवस्था अच्छी रही होगी तथा उसमें खामी नहीं रही होंगी। इसलिए, उन्होंने कतिपय धार्मिक मतों के किये गये परिवर्तनों के परिणामस्वरूप कानूनी प्रणाली में कोई परिवर्तन करने की ओर ध्यान नहीं दिया।
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इसी प्रकार, जब महावीर ने अपना धर्म स्थापित किया तो उन्होंने जैनियों के लिए एक नई कानूनी व्यवस्था नहीं बनाई। उन्होंने वही कानूनी प्रणाली जारी रखी तथा मैं समझता हूँ कि सरदार हुकम सिंह मेरी बात में सुधार करेंगे यदि मैं यह कहने में गलती कर दूँ कि दस गुरुओं में से किसी भी गुरु ने सिखों के लिए कानूनों की कोई पुस्तक नहीं बनाई। समस्या यह है कि यही सच्चाई है - आप इसे समस्या कह सकते हो, आप इसे दुर्भाग्य कह सकते हो, मैं शब्दों पर नहीं जाता। यद्यपि इस देश में धर्म बदले हैं, परन्तु कानून एक ही रहा है। इसीलिए सिख कानून का पालन करता है।
सरदार हुकम सिंह : परन्तु अब आप एक नया कानून बना रहे हो।
डॉ. अम्बेडकर : अब यह एक नई चीज है। जैन समुदाय के लोग पूछते हैं कि ‘‘आप हमारे लिए क्या कर रहे हैं? क्या आप हमें हिंदू बना रहे हैं?’’ इसी तरह सिख और बौद्ध भी पूछते हैं। इस संबंध में मेरा उत्तर यह है कि ‘‘मैं इसमें कोई मदद नहीं कर सकता हूँ। आप एकमत कानून प्रणाली अपनाते रहे हैं और किसी के लिए यह कहने में अब बहुत देर हो गई है कि वह इस कानूनी प्रणाली को पूर्णतः अस्वीकार कर देगा तथा इससे उसका कोई लेना-देना न होगा।’’ ऐसा नहीं हो सकता है। इसलिए, बौद्धों, जैनियों, सिखों पर हिंदू कानून और हिंदू संहिता लागू करना एक ऐतिहासिक घटना होगी और इसका उत्तर न तो आप दे सकते हैं और ना ही मैं। हम केवल यही कह सकते हैं कि यह गलत हुआ है तथा इसे बदला जाये, इसमें सुधार किया जाने अथवा इसे अधिक निष्पक्ष बनाया जाये और हम यही कर रहे हैं। जहाँ तक सिखों का प्रश्न है, प्रिवी कौंसिल से यह पता चलता है कि इस प्रश्न पर 1830 से भी बहुत पहले चर्चा हुई थी और तब यह निर्णय लिया गया था कि जहाँ तक कानून का संबंध था, सिख लोग हिंदू ही थे। 1830 से 1950 के दौरान आप कानूनी प्रयोजनार्थ हिंदू ही माने गये हैं।
सरदार हुकम सिंह : इसमें कोई शक नहीं है।
डॉ. अम्बेडकर : कानून में, हमारा एक सिद्धांत है जिससे ‘‘स्टेयर डोसिसिस’’ कहा जाता है अर्थात् बहुत पहले लिया गया निर्णय, जिस पर लोगों ने सोचा कि इसे न बदला जाये, चाहे वह गलत हो।