हिंदू कोड - जारी - Page 124

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श्री आर. के. चौधरी : क्या आप कल प्रश्नकाल के दौरान मुझे वहाँ बैठने देंगे?

मैं यह मानता हूँ कि इस सदन में मैं अकेला पड़ गया हूँ, परन्तु मैं, यह उम्मीद करता हूँ कि कानून मंत्री पद स्वीकार करेंगे कि वह सदन के बाहर पूर्णतः अलग-थलग पड़े हैं। मुझे अपनी स्थिति पर खेद नहीं है क्योंकि इस सदन के माननीय सदस्य, माननीय महिला सदस्यों से यह सच बोलने से डर रहे हैं कि वे स्वयं को काफी उग्र सिद्ध कर रहे हैं। मेरा विनम्र निवेदन है कि यह मामला हंसी में टालने वाला नहीं है। इस सदन के माननीय सदस्यों ने यह ध्यान किया होगा कि कल जिस तरह मेरे आदरणीय मित्र बाबू रामनारायण सिंह को उनकी सीट से हटाया गया था। एक विशेष महिला सदस्या के उदार हृदय के कारण ही मेरे माननीय मित्र अपनी सीट तक जा पाये।

महोदय, मैं हमारे महिला सदस्यों के उग्र रूप की ओर सदन को सचेत करता हूँ। यही समय है कि हम कुछ बोलें, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि वह इस हिंदू संहिता को किसके लिए बना रहे हैं तथा किसने यह चाहा कि वह इस विधेयक को लाएं और इसे हिंदू समाज के बड़े वर्ग की इच्छाओं के विरुद्ध कार्यरूप दें? क्या यह इसलिए नहीं है कि इस सदन के माननीय महिला सदस्यों ने उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया है?

फिर भी, मैं माननीय मंत्री से कहना चाहूँगा कि वह इस विषम परिस्थिति में अकेले नहीं हैं। इस सदन को ज्ञान होगा कि हमारे माननीय मित्र, आचार्य कृपलानी ने प्रवर समिति की रिपोर्ट पर विचार करते समय इस सदन के एक सहयोग और विश्व में उनके साथी द्वारा अपनाए गये रुख के बारे में बोला था। उन्होंने कहा कि वह बोलने का साहस इसलिए जुटा रहे थे क्योंकि उनकी साथी विदेश गई थीं और जब वह वापस आयीं तो वह गृहस्थी के सभी खर्चों का लेखा-जोखा अनुपस्थिति के दौरान उनके आचरण के बारे में पूछ सकती थीं।

महोदय, इससे लगता है कि हम आज कहां हैं। इसी कारण आप कम प्रगतिशील हिंदू महिलाओं, जो स्वयं को उचित ढंग से सज्जित भी नहीं कर पाती हैं, की भावनाओं को अनदेखा करने के लिए तैयार हो आप उन महिलाओं को जो चमकीली भड़कीली साडि़यों का सहारा नहीं ले सकती हैं, जो स्वयं को सजा नहीं सकतीं, अपने तरीके से दबाने की कोशिश कर रहे हो।

एक माननीय सदस्य : क्या यह सब खंड 2 में है?

श्री आर. के. चौधरी : मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं मेरे मित्र श्री जसपत राय कपूर द्वारा रखे गये, संशोधन के अलावा सभी संशोधनो मेरे माननीय मित्र डॉ.