हिंदू कोड - जारी - Page 127

112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्ष : इसके अंतर्गत ये सब बातें कहाँ से आती हैं?

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श्री आर. के. चौधरी : मैं केवल इससे जुड़ी बातें कह रहा था। अब मैं अति

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महत्वपूर्ण मुद्दे पर आता हूँ। चूँकि हमें मतदाताओं का जनादेश मिलने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ है तथा इस विधेयक के परिचालन के परिणामस्वरूप दिये गये अथवा प्राप्त हुए बहुमत को हम अनदेखा कर रहे हैं। हमें इस बात पर ध्यानपूर्वक विचार करना चाहिए कि इस विधान को किस सीमा तक स्वीकार किया जायेगा। मैं अपने माननीय मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद की इस बात से सहमत हूँ कि इस विधान को पारित करने के लिए लोगों की सहमति आवश्यक है। जहाँ तक भेदभाव की बात है, इस विधान के भेदभाव वाले स्वरूप तथा संविधान के प्रावधानों को लागू करने के तरीके के बारे में कल काफी विस्तार से चर्चा हुई थी। यदि मुझे सही तरह से याद है तो डॉ. अम्बेडकर ने भी संविधान के कतिपय मूल अधिकारों के उल्लंघन के प्रश्न का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान हिंदू कानून में उनके अनुसार संशोधन न किया गया तो उच्चतम न्यायालय अथवा उच्च न्यायालय में यह प्रश्न उठ सकता है तथा वहाँ पर अन्य पार्टियों द्वारा यह प्रश्न जायेगा कि हिंदू कानून शूद्र और गैर-शूद्रों में भेद करता है। किसी भी आयु वाला शूद्र गोद लिया जा सकता है। एक शूद्र को तब भी गोद लिया जा सकता है जब वह निकट संबंधी भी हो, परन्तु इसी स्थिति में किसी ब्राह्मण को गोद नहीं लिया जा सकता है, इसलिए, वर्तमान हिंदू कानून में भेद है, उन्होंने कहा कि जब तक वर्तमान हिंदू संहिता को स्वीकृत नहीं किया जाता है, तब तक वर्तमान हिंदू कानून किसी भी अदालत का इस आधार पर आलोचना का शिकार होता रहेगा कि वह भेदभाव वाला है।

महोदय, मैं एक और गम्भीर प्रश्न पर आता हूँ। मेरा सुझाव है कि मेरे माननीय मित्रों, सर्वश्री झुनझुनवाला और नजीरुद्दीन अहमद द्वारा कही गई बातों पर भी गम्भीरता से विचार करना चाहिए। मैं सदन का ध्यान इस विधान के भेदभाव वाले स्वरूप, जो संविधान पर ही प्रहार है, की और आकर्षित करना चाहता हूँ। मेरे माननीय मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद और मैं इस तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे हम एक ही दिशा में जा रहे हैं। वह यहां एक बेंच पर अकेले हैं और मैं दूसरे बेंच पर। भगवान न करे, यदि मेरे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद अपनी पहली पत्नी के जिंदा रहते दूसरी पत्नी लाते हैं, तो उन पर भारतीय दंड संहिता अथवा हिंदू कोड के अंतर्गत अभियोग नहीं लगाया जा सकता है जबकि मैं उसी सदन का सदस्य होने तथा उनका निकट पड़ोसी होने के नाते यदि उनका अनुसरण करूँ तो मेरी दशा क्या होगी? मुझे प्रताडि़त किया जायेगा, मुझ पर अभियोग चलाया जायेगा, जेल भेजा जायेगा तथा सम्भवतः मेरे साथ मेरे मित्रों द्वारा मुझे जेल ले जाये जाने के दौरान दुर्व्यवहर किया जायेगा।