हिंदू संहिता : जारी - Page 135

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय अध्यक्ष : अब विधेयक पर चर्चा की जाए।

श्री बी. दास (उड़ीसा) : महोदय, खंड 2 पर चर्चा सम्पूर्ण विधेयक पर आम चर्चा के बराबर हो गई है। मेरे विचार से इस संहिता को पारित करने के लिए आपने आज अंतिम दिन निर्धारित किया है। अनेक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

माननीय अध्यक्ष : कृपया व्यवस्था बनाये रखें। क्या माननीय सदस्य को समय-सीमा निर्धारित करना चाहते हैं? अनेक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

श्री बी. दास : मैं चाहता हूँ कि खंड 2 के संबंध में वक्ताओं को बोलने नहीं दिया जाना चाहिए...... अनेक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

माननीय अध्यक्ष : व्यवस्था बनाए रखें। माननीय सदस्यों को ‘हाँ’ या ‘न’ कहने की आवश्यकता नहीं है। चर्चा को बंद करने का प्रस्ताव लाया जाये तथा यदि सभी सदस्य यह महसूस करते हैं कि पर्याप्त चर्चा हो चुकी है तो मैं चर्चा बंद करने की बात स्वीकार करता हूँ। परन्तु यदि मैं इसे स्वीकार कर लेता हूँ तो यह सदन पर निर्भर है कि उसे स्वीकार अथवा स्वीकार करें। जहाँ तक चर्चा के स्वरूप का प्रश्न है, यद्यपि मैं महसूस करता हूँ कि हम बहुत ही सामान्य टिप्पणियों की गहराइयों में जा रहे हैं। फिर भी मैं स्वयं नहीं जानता हूँ कि चर्चा को किस तरह से रोका जा सकता है तथा वह भी विशेष रूप से खंड 2 के संदर्भ में, इसमें कुछ समुदायों को शामिल करने तथा बाहर निकालने की बात की गई है। दोनों पक्षों की तरफ से संशोधन प्राप्त हुए हैं। इसलिए इन समुदायों को शामिल करने अथवा अलग करने के मामले को प्रमाणित करने के लिए कम से कम एक आम सर्वेक्षण की आवश्यकता है। इसीलिए मैं उस प्रश्न पर चर्चा रोकने में कठिनाई महसूस कर रहा था। तथापि, मेरा विश्वास है कि अब कोई प्रश्न अथवा स्पष्टीकरण नहीं पूछा जायेगा। अब हमें विधेयक पर शीघ्रता से चर्चा करनी चाहिए।

* श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार) : पूरे दो दिन तक इस पर चर्चा हुई है। जो

fcg kj

भाषण सदन में दिए गए हैं वे इस बात का संकेत हैं कि संहिता के प्रति देश में स्वागत है, माननीय डॉ. अम्बेडकर को जो इसके प्रबल समर्थक और आशावादी हैं उन्हें सही निर्णय लेने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

* सं. वा. वि. खंड- VIII, भाग- II, 7 फरवरी, 1951, पृष्ठ 2488-99