122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के प्रश्न पर विचार व्यक्त किए इसे एक व्यर्थ की चर्चा समझ कर नहीं छोड़ा गया - क्योंकि यह समझा गया कि यह विधेयक कानून बनाते समय सिखों पर भी लागू होगा। वे पूर्ण अधिकार रखते हैं कि यह बात बताएं कि सिखों को विवाह एवं रीति-रिवाजों और उत्तराधिकार के मामले में इस विधेयक से क्या नुकसान हो सकते हैं। इस प्रकार वे सवाल एक दूसरे के परिपूरक हैं। इसलिए अच्छा होगा कि ये प्रश्न इसलिए बार-बार न उठाए जायं।
श्री सोनवाने : लेकिन, महोदय...
माननीय अध्यक्ष : व्यवस्था बनाए रखें।
श्री श्यामनंदन सहाय : जैसा कि मैं कह रहा था, अब तक व्यक्त किए गए मतों - के काफी विस्तृत हैं तथा माननीय विधि मंत्री के पास हैं - की ध्यानपूर्वक समीक्षा की जाए तो उनसे इस संहिता के विभिन्न प्रावधानों के विरोध का पता ही नहीं चलेगा। बल्कि संहिता के बारे में हिंदू समुदाय में व्याप्त रोष, चिंता और परेशानी का भी पता चलेगा। मैं जानता हूँ तथा उन लोगों की ईमानदारी की भावना को महसूस करता हूँ जो समुदाय को एक अलग रास्ते पर ले जाना चाहते हैं। यह इतिहास में नयी बात नहीं है। शायद प्रत्येक सुधारक एक सुधारक नहीं होगा यदि उसने नहीं सोचा होता कि उसने धर्म के बारे में सही सोचा था तथा यहाँ पर विधेयक प्रस्तुतकर्त्ता ने जो भी कहा था, वह अप्रचलित था। इसलिए, यद्यपि मैं माननीय विधि मंत्री को वर्तमान परिस्थितियों में उस नये धर्म का प्रतिपादन करने के लिए बधाई देता हूँ जिसे स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए भावी पीढ़ी पर छोड़ दिया जाता है, मैं उन्हें तथा सरकार को निश्चित रूप से चेतावनी देना चाहूँगा कि इसे अनिवार्य विधान बनाना एक आत्मघाती नीति अपनाना होगा।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : हम आत्महत्या करने के लिए तैयार हैं।
श्री श्यामनन्दन सहाय : इस सुधार को या तो सामाजिक सुधार अथवा धार्मिक सुधार माना जा सकता है। यदि यह सामाजिक सुधार है, तो मैं नहीं समझता हूँ कि माननीय विधि मंत्री ने कल उस समय कार्यवाही रोकने की याचिका क्यों की जब कुछ माननीय सदस्यों ने यह सुझाव दिया कि इसे सभी पर लागू किया जाना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने अनुरोध किया था कि हमें इस देश में गैर-हिंदुओं की भावनाओं का आदर करना चाहिए। मैं वास्तव में आश्चर्यचकित हूँ कि जब उन्होंने यह बात गैर-हिंदुओं के लिए कही, इस समय ऐसा नहीं लगता कि वह इस मामले में हिंदुओं की भावना का आदर नहीं करते हैं। इस सदन में देश के विभिन्न भागों से आये तथा हिंदू समुदाय के विभिन्न मतों और वर्गों के वक्ताओं ने स्पष्ट किया है