125
तब हुई जब उन्होंने कहा कि मतदाता अनभिज्ञ हैं तथा वे इस मामले के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं............
श्री भारती (मद्रास) : मामले की बारीकियों के बारे में।
श्री श्यामनंदन सहाय : मैंने तथा आपने उनके भाषण को सुना, रिकार्ड यहां उपलब्ध हैं। यह बारीकियों का प्रश्न नहीं है। इस देश में हिंदू समुदाय का प्रत्येक सदस्य यह अच्छी तरह जानता है कि अपने धार्मिक और सामाजिक कानूनों के संबंध में वह क्या चाहता है तथा मेरे विचार से, इस तरह के प्रश्न पर जनमत संग्रह कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी। जब मुझे याद आया कि जो व्यक्ति भारत के संविधान का निर्माता था तथा जो वयस्क मताधिकार के पक्के समर्थक थे, वह लोकतांत्रिक पद्धति के बारे में तिरस्कार पूर्ण शब्द कहें तो यह मेरे लिए आश्चर्य की बात थी तथा मैंने अपने मन में सोचा कि माननीय विधि मंत्री ने स्वयं यह कहा था कि क्या तेंदुआ अपना स्वभाव बदल सकता है। आज सत्य साबित हुआ। हम यह नहीं भूल सकते हैं कि जब कभी तथा जहाँ कहीं भी लोकतंत्र का उदय होता है, वहाँ सभी मतदाता शिक्षित नहीं होते हैं। हमें यह पक्ष नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र स्वयं अपना शिक्षक है तथा आप मतदाता से सम्पर्क करेंगे, जितना आप उन्हें आप अपना व्यक्त करने का अवसर देंगे उतना ही अधिक आप उन्हें सचेत तथा शिक्षित बताएंगे, इसलिए मैं विधि मंत्री से निवेदन करूंगा कि हिंदू कोड के संबंध में मतदाता से परामर्श करने का बेहतर तरीका जनमत संग्रह ही हो सकता है। चाहे आज का मतदाता उस सीमा तक राजनीतिक रूप से जागरूक है या नहीं। यह बात निश्चित रूप से स्वीकार की जानी चाहिए कि वे धार्मिक भावनाओं और धार्मिक कानूनों के प्रति पूर्णतः जागरूक हैं तथा यदि आप किसी भी शहर या गांव की गलियों में किसी व्यक्ति से पूछते हो तो वह आपको यह बता पायेगा कि उसके लिए क्या अच्छा है। इसलिए, अभी भी अवसर है तथा विधि मंत्री यदि ऐसे मामले में मतदाताओं से परामर्श करते हैं तो यह अच्छा कार्य होगा।
एक माननीय सदस्य : वह स्वयं अपने मतदाता हैं।
श्री श्यामनंदन सहाय : परन्तु वह जिस तरह से लग रहा है, वैसा नहीं करते हैं, तो मेरा निवेदन है कि वह इस विधान को अनुज्ञात्मक बनाएं। यदि वह इस विधान को अनिवार्य बनाते हैं तो मैं उन्हें बता दूँ कि वह अपने प्रयास में उसी तरह सफल नहीं हो पायेंगे जिस तरह प्राचीन काल के बादशाह जैसे लोधी, तुगलक, खिलजी, सैयद और मुगल वंश पुराने धर्म और धार्मिक कानूनों को समाप्त करने के प्रयास में विफल रहे थे तथा जिन्हें उन्होंने कल पुराना कहा था। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं