हिंदू संहिता : जारी - Page 141

126 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है कि प्राचीन नियमों/कानूनों को समाप्त करने के उनके प्रयास उसी तरह सफल नहीं होंगे जिस तरह हजारों वर्ष पहले सत्तासीन लोगों के प्रयास सफल नहीं हुए थे। सामाजिक संहिता की हिंदू व्यवस्था में मात्र कानूनों के अलावा कुछ और भी है। इसकी नींव अधिक गहरी है तथा इन्हें प्रभावित लोगों के परामर्श के बिना इस तरह जल्दबाजी में पारित विधानों से नहीं हिलाया जा सकता है।

माननीय विधि मंत्री का भाषण सुनते समय मुझे एक कहानी याद आती है जिसे अमृत बाजार पत्रिका में हर वर्ष एक विशेष दिन, काफी लम्बे समय तक प्रकाशित किया जाता रहा। वह कहानी एक बूढ़े पंडित की थी तथा पंडितों को गरीब ही कहा जाता है। उनकी पत्नी ने उसे घर का खर्च चलाने के लिए बार-बार लताड़ा, अब पंडित एक या दो रुपये कमाने लगा। ताकि गृहस्थी चल सके। एक दिन, सुबह ही उसके दिमाग में एक अच्छी बात सूझी और अपनी पत्नी से कहा, ‘‘अब तुम्हें खर्च की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैंने एक तरीका ढूंढा है जिससे एक लाख रुपये मिल सकते हैं।’’ उसकी पत्नी ने तरकीब के बारे में पूछा, तो उसने कहा, ‘‘मैंने कुछ दोहे लिखे हैं तथा कल सुबह मैं राजा के पास जाऊंगा और दोहे उनके सामने पेश करूँगा। मैं उन्हें कहूँगा कि यदि उनके दरबार में कोई ऐसा पंडित है जो उन दोहों की व्याख्या कर सके तो मैं उसे एक लाख रुपये दूँगा। यदि कोई उनकी व्याख्या नहीं कर पाया तो राजा मुझे एक लाख रुपये देगा।’’ उसकी पत्नी ने उसका उपहास करते हुए कहा, ‘‘आप मूर्ख हो, यदि किसी ने दोहों की व्याख्या कर दी तो आप राजा को एक लाख रुपये कहाँ से दोगे?’’ अब पंडित ने हँसी उड़ाते हुए कहा, ‘‘तुम महिलाओं में नई-नई बातें सोचने की शक्ति नहीं है। जब से तुम्हारी रचना हुई है तब से....’’

एक माननीय सदस्य : क्या यह आपका मत है ?

श्री श्यामनंदन सहाय : यह मेरा मत नहीं है, यह पंडित का मत है, मैं महिलाओं के लिए इस तरह के तिरस्कारपूर्ण शब्द नहीं कह सकता। पंडित ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, ‘‘यह बहुत आसान है।’’ उसकी पत्नी ने कहा वह क्या है तथा पंडित ने कहा, ‘‘मैं किसी व्याख्या को स्वीकार नहीं करूंगा। पंडित आयेंगे और जायेंगे और मैं किसी की व्याख्या स्वीकार नहीं करूंगा, मैं कहूँगा कि यह व्याख्या नहीं है तथा राजा को एक लाख देने होंगे।’’ हम चाहें यहाँ पर कोई भी सलाह, सुझाव का मन व्यक्त करें, यदि माननीय विधिमंत्री भी पंडित के मूड में हैं तो हम क्या कर सकते हैं? हमें उनसे प्रार्थना करनी है तथा उन्हें यह बताना है कि बाहर लोगों को क्या मन है। वह ऐसी जानकारी, जो हम अपने-अपने निर्वाचन-क्षेत्रों का दौरा करके प्राप्त कर सकते हैं, के लिए हम पर अवश्य निर्भर होंगे....

डॉ. अम्बेडकर : मेरे पास आपसे अधिक जानकारी है।