हिंदू संहिता : जारी - Page 143

128 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री श्यामनंदन सहाय : मैं बताता हूँ कि इस समय विधान का अर्थ क्या है, शायद आप विधानमंडल में नये हो। अन्यथा, आपने यह प्रश्न नहीं पूछा होता। फिर भी, कुछ ही मिनट में मैं इसका उत्तर दूँगा।

श्री आर. वेलायुधन : मैंने हिंदू संहिता पढ़ी है।

श्री श्यामनंदन सहाय : आपने हिंदू संहिता पढ़ी है। यह पर्याप्त है। तब आप सीधे स्वर्ग में जाएंगे।

यदि आप विधान को तथा इसके विभिन्न भागों को पढ़ेंगे तो आप देखेंगे कि संहिता में विभिन्न विवरणों में कतिपय अपवाद हैं। यह संहिता कुछ मामलों में ‘मरूमक्कटयम’ और ‘अलियासंतन’ कानूनों को मानने वाले समुदायों को शामिल नहीं करता है। कल माननीय विधि मंत्री ने कहा कि वह उप-खंड (4) को हटा रहे हैं ताकि वे कुछ विवाहित लोग उत्तराधिकार कानून के अंतर्गत आ सकें जिनका विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह हुआ था।

माननीय उपाध्यक्ष : उन्होंने कहा कि यह अधिक उदार था।

श्री श्यामनंदन सहाय : यदि यह उनके लिए अधिक उदार था तो मैं नहीं समझता कि अधिक उदार कानून सभी के लिए क्यों अच्छा नहीं होना चाहिए। वह हिंदू संहिता को संहिताबद्ध कर रहे हैं - कुछ नया नहीं कर रहे हैं बल्कि वर्तमान कानूनों की कुछ मामलों में अद्यतन कर रहे हैं कुछ सुधार ला रहे हैं। यदि आप चाहते हैं तो आप अधिक उदार हो सकते हैं - आपको कौन रोकता है? फिर भी यदि आप यह दावा करते हैं कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य हिंदू कानून को संहिताबद्ध करना है - विभिन्न विनिर्णयों और व्याख्याओं को ध्यान में रखते हुए तथा उनका उत्तम प्रयोग करके और प्रगतिशील सुधार लागू करके - तो मैं नहीं समझता कि आपने विवाहित हिंदुओं के एक वर्ग के लिए क्यों एक तरह के उत्तराधिकार कानून बनाये हैं तथा दूसरे वर्ग के लिए दूसरी तरह के। यदि आप ऐसा कानून चाहते हैं तो कीजिए। ऐसा करने से कोई लाभ नहीं है कि हमारे यहाँ बैठे मित्र जो नागरिक संहिता पारित कराने के पक्षधर हैं। वे वास्तव में ऐसा नहीं चाहते हैं। ऐसा कहने के लिए मैं क्षमा चाहता हूँ परन्तु मैं माननीय मंत्री को आश्वासन दे दूँ कि ऐसा नहीं है। हमारा मत यह है कि यदि आप कुछ बलिदान करके भी पूरे देश को एक निश्चित आधार पर रखना चाहते हों तो आप कीजिए और हम इसे सहर्ष स्वीकार करेंगे। परन्तु आप एक तरह से समुदायों को चुनकर रख रहे हो जो कि आपके साथ इस मुद्दे पर चलने के लिए तैयार नहीं होंगे। यदि आप एक समुदाय को चुनते हो तथा उस पर अपनी मर्जी चलाते हो और बाकी समुदाय कहते हैं कि ‘‘हमारी धार्मिक भावनाओं को मत छेडि़ये’’, तो यहीं पर वास्तविक समस्या पैदा होती है।