132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हमने इस पर गम्भीरता से विचार करने का मन बना लिया है। कल माननीय विधि मंत्री ने संहिता को तथा उनके संशोधनों को करने के लिए भरसक अनुरोध किया था। वह हमेशा एक उच्च कोटि के अधिवक्ता रहे हैं। उनके भाषण के अंशों के अलावा, भाषण के ध्वनिगुण और शैली ने उनके विरोधियों को भी लगभग आश्वस्त कर दिया।
श्री वेंकटरमण (मद्रास) : लेकिन आप नहीं थे।
श्री सी. सुब्रहण्यम (मद्रास) : इसीलिए उन्होंने कहा, ‘‘लगभग’’।
श्री अलगेसन : मैं पूर्णतः आश्वस्त होना चाहूँगा, परन्तु मुझे खेद है कि मैं आश्वस्त नहीं हूँ। मैं अभी भी माननीय विधि मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वे एक सर्वमान्य नागरिक संहिता प्रस्तुत करें, यद्यपि उन्होंने इस विचार का उपहास किया तथा ऐसा कदम उठाने वालों पर छींटाकशी की थी। उदाहरणार्थ, उन्होंने पूछा, ‘‘यह कैसे सम्भव है कि जो लोग हिंदू संहिता का पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं, से सर्वमान्य नागरिक संहिता को स्वीकार कर लेंगे?’’ उन्होंने उनके इरादों पर प्रश्न चिन्ह लगाया, परन्तु मैं उनसे आदरपूर्वक पूछता हूँ कि ‘‘वे हिंदू संहिता का विरोध क्यों करते हैं? क्या यह इस तथ्य के कारण नहीं है कि यह सम्पूर्ण राष्ट्र पर लागू नहीं होता है?’’ यह एक ही समुदाय पर लागू होता है, चाहे वह कितना ही बड़ा वर्ग क्यों न हो। इस प्रकार, यह संहिता एक वर्ग के लिए है, न कि सभी के लिए, क्या इसका विरोध, कम से कम अंशतः, इस कारण नहीं है कि यह सम्पूर्ण राष्ट्र पर लागू नहीं होता; सम्पूर्ण समुदाय पर लागू नहीं होता?
फिर उन्होंने कहा कि वह कल विधान प्रस्तुत करेंगे, जैसे कि किसी ने वैधानिक पाठ प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता पर संदेह व्यक्त किया हो। उन्होंने कहा समान संहिता का पाठ प्रस्तुत करने तथा सदन को इस पर विचार करने के लिए मजबूर करने की धमकी दी। परन्तु, इसके बारे में यह मुख्य बात नहीं है। यदि वह इस सदन में सब पर लागू होने वाली नागरिक संहिता लाना चाहते हैं तो इसके सभी पहलुओं पर सभी सदस्यों द्वारा विचार किया जाना चाहिए तथा वह इस संहिता पर संशोधन पेश करने वाले पहले व्यक्ति होंगे। कल उन्होंने कहा कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम में कोई कानूनी कारीगरी सुधार नहीं कर सकती है, परन्तु मुझे विश्वास है कि वह अपनी कारीगरी से अच्छे से अच्छे विधान में भी संशोधन करने जायेंगे। हिंदू संहिता के मामले में भी हम देखते हैं कि उनके संशोधनों की संख्या अन्य सदस्यों के संशोधनों की संख्या से अधिक है। वह बार-बार इसलिए संशोधन कर सकते हैं, क्योंकि अन्य लोग ऐसा चाहते हैं।