हिंदू संहिता : जारी - Page 151

136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री अलगेसन : मेरे विचार से आजकल के भारतीय मुसलमान इसका धार्मिक आधारों पर विरोध नहीं करेंगे। शायद, अरब साम्राज्य के बढ़ते क्षेत्र के कारण ही मुसलमानों को चार पत्नियाँ रखने की अनुमति दी जाती थी। वे साम्राज्य का विस्तार करना और उसे सुरक्षित रखना चाहते थे तथा इसीलिए, उन्हें चार पत्नियाँ रखने की अनुमति थी, परन्तु, इस देश में आज एकदम विपरीत स्थिति है। यद्यपि हमारे प्रधानमंत्री बच्चों के साथ खेलना पसंद करते हैं और अपनी चिंताओं को भूल जाते हैं, वह इस देश में उनके प्रथम आगमन का स्वागत करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने यह बात स्पष्ट कही है, अधिक से अधिक बच्चे होने की संभावना से वह तथा अन्य सभी निश्चित रूप से भयभीत रहते हैं। यह सर्वविदित तथ्य है। मुझे सन्देह नहीं है कि हमारे मुसलमान मित्र इस बात को महसूस करेंगे तथा अपने वर्तमान धार्मिक कानून और प्रथा को ध्यान में रखकर मुख्य धारा में आने की कोशिश करेंगे। ऐसी कोई बात नहीं है कि इस देश के लिए सार्वजनिक नागरिक संहिता तैयार करने में विकट बाधाएंँ सामने आ रही हैं।

मैं चीन का उदाहरण देना चाहूँगा। वह हमारे देश की तरह प्राचीन हैं। प्राचीन परम्पराओं के अलावा, उन्होंने हाल ही में एक नागरिक कानून तैयार किया है जो डॉ. सुन यात सेन द्वारा प्रतिपादित ‘जनता के तीन सिद्धांतों’ को लागू करने का प्रयास करता है। जैसा कि सदन को ज्ञान है, ये सिद्धांत हैं : राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और सर्वांगीण आर्थिक प्रगति। हमारी स्थिति चीन की स्थिति के समान होने के कारण हम चीन के उदाहरण का अनुसरण कर सकते हैं तथा राष्ट्रपिता के सिद्धांतों को अपनाकर उन्हें कार्यरूप देने का प्रयास कर सकते हैं। इस देश के सभी बड़े धर्मों को एक नागरिक संहिता के दायरे में लाने से बेहतर उनके लिए कुछ भी नहीं है।

मेरे माननीय मित्र श्री पंडित ठाकुरदास भार्गव ने जोरदार शब्द कहे तथा इस संहिता में कही गई अधिकांश बातों का उन्होंने संहिता की सभी मुख्य विशेषताओं का स्वागत किया, क्योंकि उन्हें विश्वास था ये विशेषताएँ इस देश की भावी नागरिक संहिता का आधार बनेंगी और उन्होंने महसूस किया कि वह सही दिशा में उठाया गया कदम है, परन्तु मैं इस दलील को स्वीकार करने में असमर्थ हूँ। यह नागरिक संहिता तैयार करने के प्रश्न को टालना जैसा है। हमने पूरा प्रयास किया है और हिंदू समुदाय एक सार्वजनिक नागरिक संहिता की परवाह नहीं करेगा। साधारणतः यह धारणा रही है-और मैं समझता हूँ कि इसके लिए सही आधार मौजूद है - कि हम हिंदू जैसी किसी भी चीज में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार हैं। परन्तु जब अन्य से संबंधित बात हो तो हम पीछे हट जाते हैं।

प्रो. रंगा : एक-एक करके।