हिंदू संहिता : जारी - Page 154

139

मतदाताओं से परामर्श करने से मना कर रहे हैं जिन्होंने उन्हें यहाँ भेजा है तो मैं उनके साथ बहस नहीं करना चाहूँगा।

डॉ. अम्बेडकर : वे अगली बार मुझे नहीं चुनेंगे।

श्री बिश्वनाथ दास : इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आप अपने निर्णय पर कायम रह सकते हैं। आपको उनके मतों की जरूरत नहीं है और इसी कारण आप इसे सरल रास्ता समझते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : मुझे अपने चयन से अधिक संहिता की चिंता है।

श्री बिश्वनाथ दास : मैं अपने चुनाव की चिंता नहीं कर रहा हूँ। मैं एक निर्वाचित सदस्य के उत्तरदायित्वों के बारे में सोच रहा हूँ।

डॉ. अम्बेडकर : एक बज गया है। क्या आपने अपनी बात कह ली है?

श्री बिश्वनाथ दास : मैं दोपहर में भी बोलूँगा।

तत्पश्चात् सभा ढाई बजे तक भोजनावकाश के लिए स्थगित हुई।

सभा भोजनावकाश के पश्चात् ढाई बजे पुनः समवेत हुई।

mi kè; {k
hBk lhu

श्री बिश्वनाथ दास : आज सुबह मैं अपने भाषण के दौरान यह कह रहा था कि जब लोकतांत्रिक देशों में महत्वपूर्ण विधान और प्रश्न विचार के लिए प्रस्तुत किये जाते हैं तो उन्हें कानून की पुस्तक में दर्ज किया जाता है तो पार्टी किस तरह से विधान पर दूरदर्शिता से विचार करती है....

श्री रामराज जजवारे (बिहार) : महोदय मैं व्यवस्था के प्रश्न पर हूँ। सत्ता पक्ष की बेंचों पर कोई सदस्य नहीं बैठा है?

माननीय उपाध्यक्ष : यह खेद की बात है कि सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई भी नहीं बैठा है। विधिमंत्री अभी अंदर आये हैं।

श्री बिश्वनाथ दास : देश के समक्ष चुनाव घोषणा-पत्र के रूप में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा रहा है तथा तत्पश्चात् उस घोषणा-पत्र के आधार पर चुनाव होते हैं और पार्टी उन सिद्धांतों के पक्ष में मत प्राप्त करती है जिन पर वह दृढ़ता से कायम रहती है। अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित विधानमंडल में अर्थात् वर्तमान संसद में इस तरह का कार्य करना असम्भव है। फिर भी हमारा निर्वाचक मंडल है। यह निर्वाचक मंडल एक जागरूक मतदाता है। न तो माननीय विधिमंत्री और न ही ये