हिंदू संहिता : जारी - Page 157

142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसका इंतजार कर रहे हैं। यदि दो दिनों में एक सार्वजनिक नागरिक संहिता सम्भव है तो हमें इसे लाना चाहिए। उन्हें इसे लाकर हम पर मेहरबानी करने दो।

डॉ. अम्बेडकर : श्री दास, यह होगा, आप स्वयं सारी बातें बोल पाएंगे। आप अपनी ऊर्जा बचाकर रखिये। मैंने देखा है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है।

श्री बिश्वनाथ दास : मैं अपने माननीय मित्र की सलाह को नोट करता हूँ।

मैं यह मानता हूँ कि जाति व्यवस्था से भारत का भला नहीं होगा तथा जितनी जल्दी यह समाप्त हो जाये, उतना ही बेहतर है। मैं भात-हांडी प्रणाली पर जीवन यापन करने वाले समाज के बारे में नहीं सोच सकता। इस व्यवस्था में यह कहा गया है कि यदि कोई पके चावल अथवा भारत का बर्तन अथवा रोटी छू लेता है तो जाति का उल्लंघन होता है क्योंकि वह दूसरी जाति का होता है। यह हानिकारक है। हमें इस व्यवस्था को समाप्त करना चाहिए। साथ ही, मैं क्या यह नहीं समझता कि मेरे पूर्वजों ने भात-हाँडी व्यवस्था से बढ़कर कोई अन्य व्यवस्था कायम की है?

kr qo .k;
e ;
Col1 Col2
.k e
LoH kko 'k

चातुवणर्य मया सृष्ट गुणकर्म स्वभावशः

मैंने चार वर्ण बनाए हैं (अर्थात् चार प्रकार की जातियाँ) जो गुण (विशेषता), कर्म (कार्य) और स्वभाव (प्रकृति) पर आधारित हैं।

आप गीता में निर्धारित लाइनों के आधार पर ढाँचा तैयार कीजिए- वह हमें स्वीकार्य होगा। इसी जगह पर मेरे माननीय मित्र क्या करते हैं? वह ऊपर बढ़ने की बजाय नीचे की ओर जाते हैं। मैं उनके साथ ऊपर चढ़ने में सहमत हो सकता हूँ, परन्तु....

श्री जे. आर. कपूर : स्वर्ग में परन्तु पाताल में नहीं।

श्री बिश्वनाथ दास : स्वर्ग या स्वर्ग के मध्य में, परन्तु मैं उनके साथ नीचे नहीं जाऊँगा।

डॉ. अम्बेडकर : आप अपना मित्र चुनना नहीं जानते हैं?

श्री बिश्वनाथ दास : मुझे खुशी है कि मैंने भारी गलती की है?

एक सार्वजनिक संहिता कोई अजीब बात नहीं है। पुर्तगाली भारत में आज भी यहाँ मौजूद हैं। पुर्तगाली भारत में हिंदू बनकर रह रहे हैं। हम इसे भारत में क्यों नहीं लागू कर सकते जबकि भारत, पुर्तगाली भारत से काफी विकसित हैं?

यदि मेरे मित्र के कहने के अनुसार सार्वजनिक नागरिक संहिता इतना आसान