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है तो उन्हें इसे लेकर आना चाहिए। इसके बाद वह देखेंगे कि कुछ लोग जो अभी उनके विरोध में हैं, उनके साथ होंगे। परन्तु इस हिन्दू संहिता के संबंध में हम उनसे सहमत नहीं हो सकते हैं और नहीं होंगे। आप मुसलमान समाज को छोड़ नहीं सकते हैं क्योंकि इससे धर्म का खतरे में पड़ने का शोर मचेगा। आप ईसाई समाज को भी नहीं छोड़ सकते क्योंकि इसमें भी धर्म का खतरे में पड़ने का प्रश्न आयेगा। परन्तु आप हिंदू समाज को छोड़ सकते हो और उस समाज में अपने नये अनुभवों को क्रूर एकरूपता के साथ प्रचारित करा सकते हैं। हम सहमत नहीं हो सकते हैं। साठ वर्ष का व्यक्ति होने के कारण मैं तर्क को धर्म का वास्तविक आधार मानने की प्रवृत्ति पर आधारित समाज के गठन में उनसे सहमत नहीं हो सकता हूँ। हमारे देश में अध्यात्मवाद और नर्कवाद में नित्य से परस्पर विरोध रहा था। इस संघर्ष में अध्यात्मवाद ऊपर उठकर आया है। जबकि तर्कवाद और नीचे गया है। तर्कवादियों को नास्तिक तथा अध्यात्मवादी को आस्तिक कहा गया था। मैं अपने को नास्तिक नहीं समझता हूँ। माननीय मंत्री इस हिंदू संहिता के माध्यम से जिस तरह का समाज बनाना चाहते हैं, वह उस समाज जैसा है जिसके लिए भारत में प्राचीन काल में आंदोलन हुए थे तथा उस समय देश ने इसे पूर्णतया अस्वीकार कर दिया था। आज भी मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि यह देश इसे अस्वीकार करेगा। यदि मेरे माननीय मित्र इसे इच्छा पर नहीं छोड़ते हैं तो इसका कारण यह है कि उन्हें शंका है कि समाज उनके साथ नहीं जायेगा। यदि उन्हें जनमत संग्रह कराने से भय है तो इसका कारण यह है कि वह देश को साथ लेकर नहीं चल सकते हैं। यदि वह किसी अन्य विधानमंडल से नहीं बल्कि इस संसद से भयभीत हैं तो इसका कारण यह है कि इस तरह की कठोर संहिता को कोई अन्य स्वीकार नहीं कर सकता है। यही शंकाएं हैं जो माननीय मंत्री को इस संसद के जरिये इस विधान को शीघ्र पारित कराने के लिए मजबूर कर रही हैं। मेरे नेता माननीय प्रधान मंत्री ने कहा कि वह इस संहिता के प्रति कटिबद्ध हैं तथा यद्यपि वह वक्तव्य पार्टी की पूर्व सहमति के बिना दिया गया, फिर भी हमें उनका साथ देना है। हम उनका साथ देते हैं क्या मैं उनसे अपील करता हूँ तथा माननीय विधि मंत्री के माध्यम से भी....
डॉ. अम्बेडकर : यह गलत माध्यम है।
श्री श्यामनंदन सहाय : परन्तु यही एक माध्यम रह गया है।
श्री बिश्वनाथ दास : यदि यह गलत माध्यम है तो मैं इसे छोड़ता हूँ तथा महोदय, मैं आपसे निवेदन करता हूँ क्योंकि मेरे पास यही एक माध्यम रह गया है।
माननीय उपाध्यक्ष : यह माध्यम फीका है।