हिंदू संहिता : जारी - Page 161

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के अंतर्गत राष्ट्र द्वारा इतना धन व्यय किया जायेगा जो कल्पना से बाहर होगा। आप 33 करोड़ लोगों के बारे में सोचिए, आप हंस सकते हैं....

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य आप अध्यक्ष को संबोधित करें।

श्री बिश्वनाथ दास : मैं माफी चाहता हूँ। माननीय मंत्री और अन्य सदस्य हंस सकते हैं। मुझे उसकी चिंता नहीं है। परन्तु मैं यह कहता हूँ कि सरकार का यह उत्तरदायित्व है कि वह सदन के समक्ष एक कार्यचालन पुस्तिका/पत्रक पेश करें जिसमें यह दिखाया गया हो कि उन्होंने पिछली सरकारों की तरह, विधेयक के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने पर कितना व्यय किया है। यदि हम यह मान लें कि कुछ जनसंख्या का एक प्रतिशत लोग न्यायालयों में जाते हैं तो देश में न्यायालयों और पंजीकरण विभागों की भरमार हो जायेगी।

माननीय अध्यक्ष : मैं यह बताना चाहूँगा कि इस समय हम विधेयक के खंड 2 पर चर्चा कर रहे हैं जो कि संहिता के कार्यान्वयन से संबंधित है। माननीय सदस्य जो मुद्दा उठा रहे हैं वह संहिता के प्रावधानों के संचालन पर होने वाले व्यय से संबंधित है। क्या इस प्रश्न को विवाह से संबंधित प्रावधानों पर विचार करते समय नहीं लाया जा सकता है? यह प्रश्न तब उठेगा जब उस खंड पर विचार होगा जिसमें यह कहा गया है कि विवाहों का पंजीकरण होगा। इस समय सम्पूर्ण विधेयक पर सामान्य चर्चा नहीं हो सकती। हम इस समय खंडवार चर्चा कर रहे हैं। इसलिए, माननीय सदस्य के भाषण में बार-बार व्यवधान करने के बजाय, वह अपनी टिप्पणियों को तब तक सीमित रखें जब तक हम विवाह के अनिवार्य पंजीकरण संबंधी खंड पर नहीं आते।

श्री बिश्वनाथ दास : महोदय, मैं आपको मार्गदर्शन कराने के लिए धन्यवाद देता हूँ तथा इस बात को मैं ध्यान में रखूँगा। परन्तु मुझे भी इस संबंध में कुछ कहना है। खंड 2 में इस तरह के संशोधन हैं कि राज्य विधानमंडलों को विधेयक को कानून में पारित किये जाने के पश्चात् इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए छूट दी जाये। इसीलिए विभिन्न राज्यों में वित्त का प्रश्न मुख्य रूप से आता है। आपने विवाह का उल्लेख किया, परन्तु यह विवाह के बारे में नहीं है जिसमें आपको धन

खर्च करना होता है....

v ijkg~

अपराह्न 3.00 बजे

माननीय अध्यक्ष : मैंने विवाह का उल्लेख इसलिए किया क्योंकि माननीय सदस्य इसका उल्लेख कर रहे थे। मैंने इसे केवल उदाहरण के तौर पर उठाया था। राज्य सरकारों को तभी लागू करना होगा जब संशोधन स्वीकार हो जाये। परन्तु यदि