हिंदू संहिता : जारी - Page 162

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यह मान लिया जाये कि संशोधन पारित होकर स्वीकार कर लिया गया है तो उस स्थिति में केवल ऐसे प्रावधानों को ही लागू किया जायेगा जिन्हें सदन द्वारा अंततः स्वीकार किया जाता है। इसलिए जब हम किसी ऐसे प्रावधान पर बोलते हैं जिसमें व्यय का मामला निहित हो तो माननीय सदस्य अपने तर्क देने के लिए सक्षम हैं - परन्तु इस समय नहीं, यही मैं कह रहा था।

श्री बिश्वनाथ दास : आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। महोदय, मैं इस पर आगे नहीं बोलूँगा।

श्री श्यामनंदन सहाय : महोदय, क्या मैं इस संबंध में कुछ कह सकता हूँ? नये नियमों के अंतर्गत व्यय से संबंधित प्रत्येक विधान को व्यय आकलन के साथ सदन में प्रस्तुत किया जाता है। इसीलिए, मेरे माननीय मित्र उन नियमों का उल्लेख कर रहे थे।

माननीय अध्यक्ष : इसमें और आगे चर्चा करने के लिए कुछ नहीं है। इससे प्रासंगिकता के प्रश्न पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। परन्तु मेरा विश्वास यह है कि इस विधेयक को उक्त नियम के लागू होने से बहुत पहले प्रस्तुत कर दिया गया था।

डॉ. अम्बेडकर : हाँ, महोदय। मैं अपने मित्र को बता दूँ कि यह विधेयक एक राजस्व देने वाला विधेयक है।

माननीय अध्यक्ष : वह अलग विषय है। हमें उससे कोई मतलब नहीं है।

श्री बिश्वनाथ दास : मेरे माननीय मित्र कहते हैं कि यह विधेयक राजस्व देने वाला विधान होगा....

माननीय अध्यक्ष : हमें इसमें जाने की जरूरत नहीं है।

श्री बिश्वनाथ दास : मेरे मित्र इस विधेयक तथा विशेष रूप से इस खंड के पारित होने का दावा इस आधार पर करते हैं कि यह प्रगतिवादी है, यदि ऐसा है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यदि वह मुझे यह आश्वासन कर सकते हैं कि उनके द्वारा बनाया गया विधान प्रगतिवादी है तो मैं निश्चित रूप से उनका साथ दूँगा। परन्तु मैं महसूस करता हूँ कि यह कुछ मामलों में प्रगति-विरोधी है और कोई भी सोच सकता है। इस संबंध में, मैं अपने माननीय मित्र का ध्यान बाल-विवाह प्रतिबंध अधिनियम, जो पिछले 25 वर्षों से भी अधिक समय से अस्तित्व में रहा है और एक अप्रचारित कानून है की ओर आकर्षित करना चाहूँगा। अनेक माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

माननीय अध्यक्ष : इन्हें अपनी बात कहने दो, वह उनका मत है।

डॉ. अम्बेडकर : उनका गलत मत है।