हिंदू संहिता : जारी - Page 168

153

1937 में शरीयत कानून पारित किया जो सभी भारतीय मुसलमानों के लिए है। शरीयत अधिनियम की धारा-3 में कहा गया है-

(1) कोई भी जो निर्धारित प्राधिकारी को यह संतुष्ट करता है कि - (क) वह मुसलमान है, (ख) वह भारतीय विवाह करार अधिनियम, 1872 (1872 का 9) की धारा 11 के अंतर्गत इकरार करने के लिए सक्षम है, (ग) वह ब्रिटिश भारत का निवासी है -निर्धारित प्रपत्र में अभिकथन द्वारा, जिसे नियत अधिकारी है समक्ष दर्ज किया गया हो। यह घोषणा करता है कि वह इस अधिनियम के लाभ प्राप्त करने का इच्छुक है और तत्पश्चात् धारा-2 के प्रावधान घोषणा करने वाले व्यक्ति, उसके नाबालिग बच्चों और उनकी भावी संतानों पर भी लागू होंगे। इसमें दर्शाये गए मामलों के अलावा, दत्तक-ग्रहण, वसीयत और विरायत संबंधी मामले में भी शामिल थे।

इसलिए मेरे माननीय मित्र, श्री जसपत राय के संशोधन में कुछ भी विचित्र बात नहीं है। यह एक ऐसा विधान है जिसे सावधानीपूर्वक स्वीकार किये जाने की जरूरत है। अधिकांश समुदाय इसे नहीं चाहते हैं तथा वे अपना ध्यान स्वयं रख सकते हैं। क्या यह सदन, विशेष रूप से मेरे माननीय के नेतृत्व में, बाहर लोगों को यह बताने और सलाह देने में सक्षम है कि जो कुछ भी वे अपना रहे हैं वह गलत है तथा उन्हें अपना तरीका बदलना चाहिए? मैं इस आधार पर यह नहीं कह रहा हूँ कि वह संसद ऐसा करने में सक्षम नहीं है। मेरा व्यक्तिगत मत यह है कि यह संसद उस तरह विधान पारित नहीं कर सकती है जैसा कि अंग्रेजी शासन के दौरान होता था। अब हमें लिखित संविधान के अनुसार चलना पड़ता है। मेरा व्यक्तिगत विचार यह है कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत मामलों तथा उसके वैवाहिक संबंधी से जुड़ी परम्परायें उसके मूल अधिकारों से नियंत्रित होती हैं तथा इसमें किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। जब तक वह परम्परा और प्रक्रिया जिसे मैं विवाह के संबंधों में अपनाता हूँ, लोक नैतिकता के विरुद्ध नहीं है तथा वह आपत्तिजनक और अनुचित नहीं है, यह मेरा अधिकार है तथा इसमें किसी को हस्तक्षेप करने का हक नहीं है। इसलिए, हमें इस मामले में सावधानी बरतनी चाहिए।

जहाँ तक प्रगतिवादी बातों का संबंध हैं, हमने कई कानून बनाए हैं। इस संबंध में हिंदू पुनर्विचार अधिनियम है। मेरे माननीय मित्र ने बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम का उल्लेख किया। यह सत्य है कि इससे बाल विवाह समाप्त हुए हैं। परन्तु इसने विवाहों को भी समाप्त कर दिया है। हर जगह एक नई समस्या खड़ी हुई है। आज कई लड़कियां अविवाहित हैं। यदि आप सेना में नर्स और डॉक्टरों के रूप में लड़कियों को भर्ती करना चाहते हैं तो उनकी कोई कमी नहीं होगी। क्या आपने ऐसी समस्या के बारे में पहले कभी सुना है? हमारे मित्रों जिनमें पंडित ठाकुरदास भार्गव