154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
भी शामिल हैं, चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि जल्दी विवाह होने से लड़कियाँ विधवा हो जाती हैं। क्या इस बात की कोई गारंटी है कि जब एक पुरुष 15 वर्ष की लड़की से विवाह करता है तो वह लगातार जिन्दा रहेगा। मैं नहीं समझता कि भगवान ने अपनी सूक्ति में यह व्यवस्था की है कि 15 वर्ष की लड़की से विवाह करने वाला पुरुष लम्बी आयु तक जिंदा रहेगा तथा 15 वर्ष से कम आयु की लड़की से विवाह करने वाला पुरुष जल्दी स्वर्ग सिधार जायेगा। इसलिए, इस मामले में किसी की गारंटी नहीं है। यह तो सुख-सुविधा के संतुलन का प्रश्न है।
हमने मानव समाज के अलावा कहीं भी विवाह के बारे में नहीं सुना है। जानवर विवाह नहीं करते हैं; उनमें तलाक का कोई कानून नहीं है; उनका पारिवारिक जीवन नहीं है। मानव जाति के बारे में ही विवाह को परम्परा को असुविधा से बचने के उद्देश्य से एक पुरूषार्थ के रूप में निर्धारित किया गया है। जैसा कि महर्षि ने कहा है, चार पुरुषार्थों में से तीन- अर्थात् मोक्ष, धर्म (समाज का रख-रखाव) और अर्थ (राजनीति और अर्थशास्त्र) एक खुशहाल पारिवारिक जीवन पर निर्भर करता है। इस पर हमारे सभी पूर्वजों ने जोर दिया था, जबकि पश्चिमी समाज में व्यक्तिवाद हमेशा से ही शीर्ष पर रहा है, यहाँ परिवार ही हमारे समाज की इकाई है। मेरे कहने का मतलब यह नहीं है कि कोई भी मानवीय रीति-रिवाज इतने अनुकूल हैं कि कोई असुविधा ही न हो। जहाँ तक हमारे विवाह कानूनों का संबंध है, कोई भी महिला तब तक अविवाहित नहीं रहती है जब तक वह संन्यासिन नहीं बने रहना चाहती। एक संस्कृत श्लोक में कहा गया है कि किसी भी महिला को आजादी का अधिकार नहीं है। परन्तु इसका गलत अर्थ लगाया गया है। कोई भी महिला 25 वर्ष की पैदा नहीं होती है। वह भी माँ के गर्भ से जन्म लेकर बालिक होती है तथा विवाह होने के बाद बूढ़ी हो जाती है। जब पुरुष और महिला छोटे होते हैं तो दोनों नाबालिग कहलाते हैं तथा उनहें तीसरा व्यक्ति मार्गदर्शन कराता है। जब तक लड़की नाबालिग रहती है, उसका पिता उसकी देखभाल करता है। जब वह बूढ़ी होती है तो क्या उसके पुत्र से बढ़कर कोई दूसरा व्यक्ति उसकी देखभाल करता है? इसलिए, जीवन के प्रारम्भ तथा जीवन के अंतिम समय में पुरुष और महिला दोनों ही क्रमशः पिता और पुत्र पर ही निर्भर करते हैं। अब प्रश्न आता है एक-दूसरे के साथ रहने का। जब भगवान ने पुरुष और महिला को बनाया है तो या तो महिला को पुरुष के साथ जाकर रहना चाहिए अथवा पुरुष को महिला के साथ, सुखी विवाह में एक महिला को अपने पति के साथ अथवा पुरुष को पत्नी के साथ रहना ही चाहिए। क्या कोई बीच का रास्ता बचा है? मैं डॉ. अम्बेडकर से पूछता हूँ। (एक माननीय सदस्य : वे साथ ही रहते हैं)। हाँ, दोनों साथ ही रहते हैं। मैं यही कह रहा हूँ। इसलिए, सदन में या तो महिला की आवाज गूँजती है अथवा पुरुष की। हम मान लेते हैं कि इसमें