हिंदू संहिता : जारी - Page 170

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कुछ मतभेद है। यदि पुरुष की आवाज गूँजती है तो कोई समस्या नहीं है। अथवा पुरुष को झुक जाना चाहिए ताकि कोई समस्या न हो। परन्तु यदि पुरुष और पत्नी में इस बात को लेकर मतभेद है कि लड़की को किसे दिया जाये तब असुविधा की बात आती है। ऐसा तो नहीं है कि पुरुष लड़कों तथा महिला लड़कियों को जन्म देते हैं। मैं पूर्ण गम्भीरता से इस सदन को संबोधित कर रहा हूँ। मैं सदन के समक्ष यही कहने जा रहा था। कुछ लोगों ने इस कारण इसे महिलाओं की संहिता समझा है क्योंकि हमारी कुछ बहनें अपने हिस्से तथा अपनी कठिनाइयों के बारे में कह रही हैं जो कि सम्भवतः अपने अनुभवों पर आधारित हो सकती हैं। यह तो कुछ इस तरह है कि पति और पत्नी कह रहे हैं कि ‘‘यह बच्चा किसका है?’’ यह किसी एक की बात नहीं है, यदि यह संहिता पारित होती है तो यह देश के पुरुषों और महिलाओं की संहिता होगी। इसलिए, हमें इस पर निष्पक्षता से विचार करना चाहिए।

हम तीन हजार वर्षों से एक विशेष रीति-रिवाज से पले-बढ़े हैं। मैं इस समय उन कई न्यायविदों का उल्लेख करूँगा जो पश्चिम से आये हैं तथा जो यहाँ प्रचलित परम्पराओं से आकर्षित हुए थे। बाद में, उनमें से कुछ ने धर्म परिवर्तन किया तथा मैक्समूलर ने तो आश्रम भी बनाया। आप उनके विचारों को जानिए। उन्होंने अपनी परम्पराओं की, इस देश में प्रचलित परम्पराओं से तुलना की। वे धर्म परिवर्तन करना चाहते थे परन्तु उनकी सामाजिक आदतों तथा रीति-रिवाजों ने उनका हाथ न छोड़ा। जिस तरह से वे हमारी परम्पराओं से मोहित हुए, उसी तरह अब हम उनके तौर-तरीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

हमें यह देखना चाहिए कि क्या यह लाभदायक है अथवा नहीं। हमें यह देखना चाहिए हिंदू कानून समिति के सदस्यों ने क्या कहा, श्री राव ने स्वयं कहा कि यह समकालिक विषय है तथा ऐसे अध्यायों के संबंध में यह प्रांतों के ऊपर छोड़ दिया जाना चाहिए कि क्या इस भाग को इस समुदाय पर लागू किया जाना चाहिए अथवा नहीं। जिस क्षेत्र में यह लागू किया जाये, उस संबंध में यह ध्यान में रखना चाहिए कि क्या इसे वर्तमान समय में लागू किया जाये अथवा इसे स्थगित किया जाना चाहिए। किसी भी सुधारक अथवा विधेयक के प्रायोजक को ये सभी बातें ध्यान में रखनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के मन में यह बात नहीं रहनी चाहिए कि उसकी आत्मा अथवा धार्मिक विश्वास अथवा ईमान को कुचला जा रहा है। हमें धीरे-धीरे लोगों को साथ लेकर चलना होगा। यह ऐसा नहीं है कि हम हिंदू धर्म के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर रहे हैं। यह ऐसा तात्कालिक प्रश्न नहीं है जिसमें हमें यह