हिंदू संहिता : जारी - Page 173

158 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

विवाह-तलाक कानून के पारित होने के बाद मद्रास में 38 आवेदन-पत्र दर्ज किये गये थे। (व्यवधान) लड़के ही विचार कर सकते हैं। तथा कोई भी लड़की किसी लड़के से विवाह नहीं कर सकती है। इन 38 आवेदनों में से 30 आवेदन-पत्र पतियों द्वारा दर्ज किये गये थे।

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श्री ए. ए. आयंगार : उनमें से अधिकांश मध्यम वर्ग के परिवार से थे, परन्तु उनमें से अधिकांश पश्चिमी शैली में शिक्षित हुए थे। जैसा कि मैंने कहा है, अधिकांश आवेदन पत्र पतियों के प्राप्त हुए थे। मेरे विचार से एक ही मामला ऐसा था जिसमें महिला को बांझ कहा गया था। मैं उसे इस संहिता के अंतर्गत लाऊँगा। एक दूसरे मामले में एक पति है जो शिक्षित वकील है तथा वह बम्बई में नियुक्त है। उसे 100 रुपये वेतन के रूप में मिलता है। लड़की एक डॉक्टर के रूप में नियुक्त है तथा उसे 400 रुपये मिल रहे हैं। लड़की पति चाहती है तथा पति अपनी पत्नी चाहता है। अड़चन यह है कि पत्नी यह चाहती है कि उसका पति उसके साथ रहे तथा पति चाहता है कि पत्नी उसके साथ रहे। विवाह के बाद पति और पत्नी में तीन वर्षों से यह

खींचतान चल रही है। पति ने कहा, ‘‘मैं कब तक उसके बिना रहूँगा?’’ न्यायालय ने पाया कि इस मामले में लड़की ने लड़के को छोड़ दिया है तथा उन्होंने विवाह को खारिज कर दिया। मैं यहाँ पर तथा सदन के बाहर अपनी बहनों से पूछता हूँ कि विधवा के पुनर्विवाह के मामले में पति की मृत्यु के बाद यह कोई नहीं जानता है कि पुरुष ने स्त्री को उसके पुनर्विवाह से पहले नहीं छुआ है। इसके बाद भी, विधवा पुनर्विवाह में कोई ज्यादा प्रगति नहीं हुई है। (व्यवधान) मेरे मित्र कहते हैं कि मैं जो कुछ भी कहता हूँ वह एक व्याख्यान है। विधवा पुनर्विवाह अधिनियम बहुत पहले पारित हो गया था परन्तु इसमें अभी भी काफी अनुनय की जरूरत है।

बंगाल से एक विधानसभा सदस्य थे। उन्होंने एक ही खंड वाला विधेयक प्रस्तुत किया जिसमें कहा गया था कि कोई भी विधुर अविवाहित प्रौढ़ा से विवाह नहीं करेगा। उनका विचार था कि कोई भी विधुर कम से कम विधवा से विवाह कर सकता है और अब हमारे कुछ मित्रों ने इस धारणा का उपहास किया तो उन्होंने विधेयक वापस ले लिया तथा अपनी गलती स्वीकार की। जब किसी व्यक्ति को पता चलता है कि एक महिला तलाकशुदा है तो क्या उस महिला को एक पत्नी के रूप में छुआ जायेगा और एक पत्नी के रूप में उसकी फिर शादी की जायेगी? मैं नहीं चाहता कि कुछ व्यक्तियों की सुविधा के लिए इस तरह समाज को विखंडित कर दिया जाये। इसमें कठिनाइयाँ हैं परन्तु दूसरी कठिनाई इस कठिनाई से कहीं अधिक भयंकर है।