हिंदू संहिता : जारी - Page 174

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आज सुबह मुझे बताया गया कि अपहृत महिलाओं का पता लगाने के उद्देश्य से पाकिस्तान से एक शिष्टमंडल आ रहा है। क्या आप ने कभी अपहृत पुरुष के बारे में सुना है? प्रकृति ने हमें इस तरह बनाया है कि इस दुनिया में पति और पत्नी के बिना कोई एकता नहीं है। पैरेगोनियन में भी पत्नी और पति बराबर होते हैं। दूसरे समुदाय में पुरुष, महिला से लम्बा होता है। क्या यह अच्छी बात है कि मैं महिला की तरह सुरीली आवाज में बोलू तथा एक महिला, पुरुष की आवाज में बात करे। इसलिए, मैं पुरुष हूँ तथा एक महिला को भी महिला की तरह रहना चाहिए। मैं देखता हूँ कि मेरे मित्र मुझ पर हँस रहे हैं, परन्तु मैं महसूस करता हूँ कि ईश्वर ने एक ऐसा खुशहाल परिवार बनाकर बहुत अच्छी व्यवस्था की, जिसमें माता-पिता सुरक्षित होंगे, छोटे बच्चे भी सुरक्षित होंगे। सम्पत्ति के कारण स्नेह नहीं होता है। प्यार और स्नेह स्वयं पैदा होते हैं तथा ये धन पर निर्भर नहीं होते हैं। हम में से अधिकांश गरीब हैं। हम विवाह करते हैं तथा पुत्र जन्म लेता है और वृद्धावस्था में वह परिवार का कार्यभार संभालता है। हम सोचते हैं कि जिस तरह हमने अपने वृद्ध माता-पिता की जिम्मेदारी निभाई, उसी तरह वह बुढ़ापे में हमारी देखभाल करेगा। स्वीकृति में सबसे अधिक बल है। किसी अन्य कानून की अपेक्षा पुराने कानून को अधिक माना जाता है और यह लगभग 3000 वर्षों से प्रचलित है।

जब मैं संसद सदस्य बनता हूँ तो आप मुझे तब तक यहाँ नहीं बैठने देंगे जब तक मैं निष्ठा की शपथ नहीं ले लेता। परन्तु, जहाँ तक विवाह का संबंध है, मैं आप सभी से पूछता हूँ कि उन पुरानी परम्पराओं को तोड़ना चाहते हैं जिसमें महिला का हाथ पकड़कर उसके पैरों को पयाल के ऊपर रखा जाता है तथा यह कहा जाता है- ‘‘हमारे दिल गंगा और जमुना की तरह एक हैं?’’ यह इस तरह का नीरस कार्य नहीं है। क्या यह वैवाहिक सुविधा के प्रयोजन हेतु है कि पुरुष अथवा महिला विवाह करते हैं? हमारे पुराने धर्मग्रंथों ने यह विधान खुशहाल वैवाहिक जीवन तथा अच्छे वंशज के प्रयोजन से किया था। मैं यह नहीं कर सकता कि मैं रोज समुदायों के लिए अन्धे, लंगड़े, और गूँगें बच्चों की विरासत छोड़ जाऊँ तथा उनसे इनका भार उठाने के लिए कहूँ। दौड़ में शामिल घोड़ों के बारे में भी हम नस्ल की बात करते हैं तथा मानवता के लिए कोई भी पुरुष किसी भी स्त्री से विवाह कर सकता है तथा फिर भी अच्छे बच्चों की अपेक्षा कर सकता है। नये विवाह का जो प्रस्ताव रखा गया है वह रेस में दौड़ने वाले घोड़े को एक लंगड़े गधे के साथ बाँधने के समान होगा।

हिंदू कानून के महान् टीकाकार श्री जायसवाल ने कहा कि हमारे पूर्वजों के पास बहुत सारे पशु थे तथा वे अच्छी नस्ल का वंश चाहने के भी इच्छुक थे। ताकि वे शेष समुदाय का दायित्व संभाल सकें। यह हमारे देश की सम्मानजनक प्रथा है।