हिंदू संहिता : जारी - Page 175

160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हिटलर भी चाहता था कि उसके देश के लिए अच्छा वंशज हो। मुसोलिनी ने भी अपने देश में कई विवाह करवाये।

हम अपने शास्त्रों में कहते हैंः ‘‘अपुत्रस्यः गतिर्नास्ति’’; ‘‘पुत्रुणन्नमनो नरकदयास्मत युयाथे पिथतृम सुताह’’ अर्थात् पुत्र अपने पिता को नरक से बचाता है। इसी मान्यता से हमारे देश में बहुत सारे बच्चे पैदा हुए हैं। अन्यथा, हमें भी बच्चों के लिए प्रत्येक माँ को एक हजार पौंड देने पड़ते। क्या हमें इस संस्कृति का मजाक उड़ाना चाहिए? यह सब कहने का अर्थ यह है कि यह हमारा दुर्भाग्य है कि राव समिति के सभापति ऐसे भद्रपुरुष हैं जिन्होंने हिंदू कानून के अनुसार विवाह नहीं किया। प्रवर समिति के कई सदस्यों का विवाह हिंदू कानून के अनुसार नहीं हुआ था। कुछ सदस्यों ने विवाह ही नहीं किया था।

श्री केशव राव (मद्रास) : कौन कहता है कि वे विवाहित नहीं थे?

माननीय अध्यक्ष : व्यवस्था बनाए रखें। मेरे विचार से हम दायरे से बाहर जाकर चर्चा कर रहे हैं।

श्री एम. ए. आयंगर : मैं विधेयक के दायरे में आऊँगा।

माननीय अध्यक्ष : उन्होंने पहले ही 35 मिनट से अधिक का समय ले लिया है। मुझे लगता है कि यह काफी लम्बा खींच गया है। वह संक्षेप में तथा विषय के संदर्भ में ही बोलें।

श्री एम. ए. आयंगर : मैं केवल उल्लेख कर रहा हूँ....

श्री तिरुमल राव : यह उल्लेख समिति के सदस्यों के संबंध में पूर्णतया व्यक्तिगत है।

श्री एम. ए. आयंगर : बाहर यह नहीं कहा जाना चाहिए कि वह उत्तम मत है; यह केवल व्यक्तिगत मत का प्रश्न है। मुझे भी इसके बारे में काफी दुख है। क्या मैं उस समय झुक जाऊँ जब यह कहा जाता है कि स्मृतिकर्त्ताओं को स्मृतियों को बदलने रखने से कोई लेन-देन नहीं है? हम क्या कर रहे हैं? हम सुबह एक कानून पारित कर रहे हैं; हम दोपहर में इसमें संशोधन कर रहे हैं। स्मृतिकर्ता बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्मृतियों में परिवर्तन लाना चाहते थे। उन्हें पुराने विचारों वाले व्यक्तियों का दर्जा दिया जाता है। यदि वे बदल गये हैं तो बदलने के लिए उनकी उतनी ही निंदा की जाती है। इतने सारी स्मृतियाँ क्यों हैं? प्रत्येक स्मृति, कानून की एक विशेष श्परवा से संबंधित है। उस तरह के कानून में परिवर्तन के प्रति जो श्रद्धा की भावना होनी चाहिए थी वह यहाँ नहीं दिखती। हम इस प्रश्न को एक अलग दृष्टि