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यह कहा जाता है कि किसी प्रथा की वैधता के लिए इसका प्राचीन नीति परक, स्पष्ट इत्यादि होना आवश्यक है। यही सिद्धांत हैं जिनके आधार पर विधि के न्यायालय में प्रथा को मान्यता प्रदान की जाएगी। मैं कहता हूँ कि यह कहना गलत है कि किसी भी स्वीकृत पद्धति के होने पर भी हम उसे इसलिए निषिद्ध कर देते हैं कि हम एक भिन्न निष्कर्ष पर पहुँच चुके होते हैं। आपको ऐसा कहने का क्या अधिकार है? यह नहीं है कि मैं संसद के इस मामले की तहकीकात करने के सामर्थ्य पर प्रश्न उठा रहा हूँ। मैं अपने माननीय मित्र से सिर्फ इतना कह रहा हूँ कि उन्हें इस समुदाय पर यह विधि लागू नहीं करनी चाहिए। यह प्रचलित विधि हो सकती है। हमें लोगों को आगे आकर इन सुधारों के बारे में कहने का मौका देना चाहिए। मैं उन आँकड़ों को जानना चाहता हूँ कि कितने लोगों ने सिविल मैरिज एक्ट के अन्तर्गत विवाह किया है। हम जनता को अज्ञानी कह सकते हैं; फिर भी यह समय बताएगा कि क्या वे अज्ञानी हैं। अतएव, मैं माननीय सदस्यों से अपील करता हूँ कि वे पानी में अब तक न कूदें जब तक कि गहराई के प्रति आश्वस्त न हो पाएं। अभी हमें क्रमशः विधयन करना चाहिए। हमारे पास विधवा पुनर्विवाह कानून था। हमारे पास महिलाओं को उत्तराधिकार में संपत्ति प्राप्त करने का अधिकार देने वाला कानून था। हमारे पास बाल विवाह पर पाबंदी लगाने का कानून और इसी तरह के अन्य कानून भी थे। अतएव, मैं कहता हूँ कि हमें प्रतीक्षा करके देखनी चाहिए। हमें धीरे-धीरे बढ़ना चाहिए। इससे हमारा कुछ भी नहीं बिगड़ेगा। हमारा कुछ भी नुकसान नहीं होगा क्योंकि हम तलाक की अनुमति नहीं देते हैं। जो तलाक चाहते हैं उन्हें ही इसकी अनुमति दी जाए। जिन्होंने नागरिक प्राधिकार के अन्तर्गत विधिवत् विवाह किया है उन्हें संयुक्त रूप से यह घोषणा करने दें कि उन पर नागरिक सिविल मैरिज एक्ट लागू होगा। यदि किसी विधान के विरुद्ध अत्यधिक सार्वजनिक मान्यता है तो हमें उस सार्वजनिक मान्यता को बदलने का प्रयास करना चाहिए। सदस्य इस प्रश्न पर शांति से और सोद्देश्य विचार करें। हम सिर्फ शेष विश्व के साथ बराबरी कर सकें इस वास्ते जो कुछ नया और अनोखा है उसे अपना कर पुरानी व्यवस्था का परित्याग नहीं कर देना चाहिए। हम ईसाईयत के अभिप्राय समझते हैं। जर्मनी एक ईसाई देश है, किंतु क्या जर्मनी में कोई झगड़े नहीं थे, क्या ईसाई एक दूसरे से नहीं लड़ते हैं? हम यह कैसे कह सकते हैं कि हमारा राष्ट्र जातियों और पंथों की मौजूदगी के कारण यूनानियों द्वारा जीत लिया गया? हम क्यों हर दूसरे व्यक्ति से गाली सुनने के लिए उसे एक मंच और मुद्दा प्रदान करते हैं? हम लोगों ने तरक्की की है और खूब तरक्की की है। स्विट्जरलैंड में वे कहते हैं कि किसी स्त्री को वोट देने का अधिकार नहीं है। तब अपनी स्त्रियां वहाँ क्यों नहीं जातीं और उनसे मताधिकार की माँग करने को कहती हैं? अपने समाज और अपनी स्त्रियों की भयावह तस्वीर प्रस्तुत करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमारी