166 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जाएगा तो यही लोग यह कहने आगे आएंगे कि इस नागरिक संहिता से अनुच्छेद 44 जो विचारों और धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी करता है, का उल्लंघन होता है। यह आपत्ति उठाई जाएगी, मुझे इसके बारे में कोई सन्देह नहीं है। नागरिक संहिता की माँग फर्जी और निरर्थक प्रतीत होती है।
यदि हम हिंदू समाज की वर्तमान दशा पर विचार करें तो पाएंगे कि विभिन्न विषयों जैसे विवाह, गोद लेने, उत्तराधिकार संबंधी विषय इत्यादि के बारे में कई मतभेद और विभाजन हैं। जब तक इन विभिन्न कानूनों का कोई संहिताकरण नहीं कर दिया जाता है तब तक इस देश के लिए उन्नति कर पाना असंभव है। जहाँ तक समाज के अन्य तबकों का संबंध हैं उनमें भी यह कुछ हद तक है। उदाहरण के लिए ईसाई और मुस्लिम स्त्रियों को कुछ अधिकार और विशेषाधिकार हैं जिसे हिंदू स्त्रियों को भी इस संहिता के द्वारा देने की माँग की गई है। इस समय ईसाई और मुस्लिम स्त्रियों को कुछ मात्रा में विरासत के अधिकार भी प्राप्त हैं। मुस्लिम स्त्रियों के मामलों में स्त्रियाँ तलाक ले सकती हैं।
| ln | L; |
|---|
श्री त्यागी : यह अधिकार नहीं है बल्कि दायित्व है।
श्री राजबहादुर : आप इसे दायित्व कह सकते हैं लेकिन मैं आपसे विधेयक के प्रावधानों पर विवेकपूर्वक विचार करने का अनुरोध करता हूँ। दूसरे कई उदाहरण हैं कि किसी हिंदू ने अपनी पत्नी को पाँच वर्षों से अधिक समय से छोड़ दिया है। हिंदुओं ने अपना धर्मान्तरण कर लिया है और इसके भी उदाहरण हैं कि हिंदू अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते हुए अन्य स्त्री को रखते हैं अनैतिकता के ऐसे मामलों में आप साहस या शौर्य के साथ बाहर नहीं आएंगे और ऐसी दीन हिंदू बहनों को तलाक की अनुमति नहीं देंगे? हिंदू पुरुष को चार या पाँच बार विवाह करने का अधिकार दिया गया है। यदि विवाह की पवित्रता है तो यह पुरुष और स्त्री दोनों के लिए होनी चाहिए। यदि एक स्त्री से पवित्र, सती और पति के प्रति विश्वासी होने की अपेक्षा की जाती है तो क्या पुरुषों को भी इन्हीं दायित्वों से आबद्ध नहीं रहना चाहिए? इसे एक पक्षीय क्यों होना चाहिए। यदि हम यह कहें कि पुरुष ईश्वर का अनुग्रह पूर्ण सृजन है तो किसी भी तरह से इससे हमारे समाज या देश का भला नहीं होगा।
अब हम इस पर दूसरे दृष्टिकोण से देखें। विश्व के वर्तमान परिस्थितियों में जब कभी एक देश की सीमाओं पर खतरा होता है और युद्ध होता है तो यह पुराने तरीके से नहीं लड़ा जाता है। यह एक संपूर्ण युद्ध है। पिछले महायुद्ध में जब ब्रिटिश लोग
खन्दकां और लड़ाई की अग्रिम पंक्ति पर गए तो ब्रिटिश महिलाओं ने कई राष्ट्रीय