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उत्तरदायित्वों को अपने हाथ में ले लिया था। उदाहरण के लिए उन्होंने रेलगाडि़याँ चलाईं, बसों को चलाया और बारूद के कारखानों में काम किया।
दुर्भाग्यवश यह सत्य है कि हम स्त्रियों को बोझ मानते हैं। मानों वह हमसे नीचे हैं। स्त्रियों के बारे में जनता की धारणा यह है कि स्त्री पैरों की जूती है। यदि ये फट गए हैं तो हम उन्हें फेंक कर नई जोड़ी ले सकते हैं।
एक माननीय सदस्य : क्या यह मान्यता राजस्थान में है?
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श्री राजबहादुर : ऐसा केवल राजस्थान में नहीं है बल्कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में है। ऐसा ऊँचे परिवारों में भी है। यह उचित समय है जब हम इस कटु सत्य को मान लें। यदि हम अपनी स्वतंत्रता के परिणामस्वरूप अपने ऊपर आई जिम्मेदारियों को बाँटना चाहते हैं तो समय आ गया है कि अब हम इसे स्वीकार कर लें। यदि हम अपने घर और इस देश भारतवर्ष को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो हमें देखना होगा कि हमारी स्त्री समुदाय को पुरुषों के बराबर ऊर्जा प्रदान की जाए। यह पश्चिमीकरण या आधुनिकीकरण नहीं है बल्कि यह समय की माँग है। आप एक राष्ट्र के रूप में अपनी रक्षा के लिए खतरों का तब तक मुकाबला नहीं कर सकते हैं जब तक कि आप अपने देश की स्त्रियों के प्रति अपनी मनोवृति में आमूल-चूल परिवर्तन नहीं पाते हैं। जब तक हमारे समाज में पुरुषों को प्राप्त हैसियत स्त्रियों को नहीं मिल जाती है, तब तक देश के पुनर्गठन के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ा जा सकता और यह कटु सत्य है कि आज स्त्रियों को वह हैसियत प्राप्त नहीं है। जब तक कि विद्यमान कानून को संहिताबद्ध नहीं कर दिया जाता है और इसे आम जनता की पहुँच तक नहीं लाया जाता है तब तक हमारे लोगों के लिए एकजुट होना असंभव होगा।
हमारे सामने जो प्रश्न है वह यह नहीं है कि क्या हमें संहिताकरण करना चाहिए। यहाँ तक कि संहिताकरण के घोर विरोधियों का भी विचार बदल गया है और वे संहिताकरण को अनिवार्य मानने लगे हैं। प्रश्न यह है कि हम कहाँ तक संहिताकरण करें। सिर्फ तीन या चार प्रश्नों ने कटु विवाद को जन्म दिया है।
एक माननीय सदस्य : यह एक सामान्य चर्चा नहीं है।
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श्री राजबहादुर : माननीय सदस्यों ने यह कहा है कि संपूर्ण संहिता को पूरे देश में लागू करना चाहिए। इस पर चर्चा हो रही है।
सबसे पहले तलाक और विवाह संबंधी कानून और फिर उत्तराधिकार के मामले में सबसे कटु विवाद खड़ा हुआ है। मैं अपने को सिर्फ इन दो विषयों तक सीमित रखूँगा। यदि हम यह समझते हैं कि हम इस काम को पूरी तरह से संपन्न नहीं कर सकते तो मैं कहूँगा कि विधेयक के प्रावधानों और माननीय विधि मंत्री द्वारा प्रस्तावित