हिंदू संहिता : जारी - Page 183

168 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नए संशोधनों में कुछ सीमा तक परिवर्तन किया जा सकता है। लेकिन जहाँ तक तलाक के मौलिक सिद्धान्त का प्रश्न है हमें यह मानना पड़ेगा।

मैं आपको यह उदाहरण दे सकता हूँ। यदि कोई व्यक्ति इस्लाम या किसी अन्य धर्म में अपना धर्मान्तरण करता है तो इस समय उसकी पत्नी और संतान को भी जबरन ऐसा करना पड़ता है। क्या यह आवश्यक नहीं है कि कम से कम इन मामलों में हमारी स्त्री बहनों को हिंदू धर्म में रहने की अनुमति प्रदान की जाए? क्या कोई वैसे मामलों में तलाक की अनुमति प्रदान करने का सिद्धांत आपत्ति कर सकता है?

जहाँ तक उत्तराधिकार का प्रश्न है मैं पिता की संपत्ति में विवाहित पुत्री को कोई भी हिस्सा देने की अनुमति प्रदान करने का समर्थक नहीं हूँ। लेकिन यदि वह अविवाहित है तो उसे उसके भाई की तरह ही हक मिलना चाहिए। यह एक संशोधन है जो मेरे विद्वान मित्र पंडित ठाकुरदास भार्गव के दृष्टिकोण से मिलता-जुलता है।

निष्कर्ष के तौर पर मैं कहूँगा कि जहाँ तक विधेयक के विरोध का प्रश्न है। इसके कुछ राजनैतिक कारण भी हैं। राजनीतिक क्षितिज पर चुनाव की संभावना मंडरा रही है और लोग काँग्रेस के प्रति नफरत से अंधा हो रहे हैं। काँग्रेस से बाहर के लोग सिर्फ इसलिए कि चुनाव आ रहे हैं इस विधान के विरुद्ध रोष फैला रहे हैं। वे चुनावी दंगल में इसे हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं। इसलिए यह उपयुक्त होगा कि हम विधेयक के प्रत्येक प्रावधान पर बड़ी तसल्ली से विचार करें। प्रत्येक मुद्दे को बारीकी से देखें ताकि इसे जनता बिल्कुल पारदर्शी रूप में देख सके। यह जाहिर है कि जब हम खंडशः चर्चा करते हैं तो बहुत सारे भ्रम और संदेह दूर किए जा सकेंगे और आपसी समझ से विवादास्पद मुद्दों का हल किया जा सकेगा और इसमें ऐसा कुछ भी नहीं होगा जिससे जनभावना और लोगों की नैतिकता को ठेस पहुँचेगी।

महोदय, इन शब्दों के साथ मैं प्रस्तावित संशोधनों का विरोध तथा इस खंड का समर्थन करता हूँ।

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सेठ गोविन्द दास (मध्य प्रदेश) : सर्वप्रथम मैं यह कहना चाहता हूँ कि बहुत ही अच्छा होता यदि....

श्री हुसैन इमाम (बिहार) : एक सूचना के संबंध में, महोदय, क्या माननीय निर्माण, उत्पादन और पूर्ति मंत्री, जो अभी यहाँ उपस्थित हैं, सभा को दिल्ली क्लॉक टावर दुर्घटना के बारे में बताएंगे? दिल्ली क्लॉक टावर गिर गया है।