हिंदू संहिता : जारी - Page 184

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कुछ माननीय सदस्यगण : यह इसका समय नहीं है।

सेठ गोविन्द दास : आप यह भाषण के बाद पूछ सकते हैं, भाषण के बीच में नहीं।

माननीय उपाध्यक्ष-कुछ माननीय सदस्य, सांव है घटना के बारे में चिंतित हैं। यदि माननीय मंत्री कोई वक्तव्य देना चाहते हैं तो वह सेठ गोविन्द दास के भाषण समाप्त करने के बाद ऐसा कर सकते हैं और तब दुर्घटना के बारे में और अधिक सूचना प्राप्त करने का अवसर हमारे पास होगा।

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घंटा पहले मिली है। फिर दिल्ली में जो कुछ हुआ है उसके लिए मैं प्रशासनिक रूप से उत्तरदायी नहीं हूँ। क्लॉक टावर के नाम की इस संपत्ति की देखभाल दिल्ली सरकार और संभवतः दिल्ली नगरपालिका कमेटी द्वारा की जाती है। लेकिन यदि सभा यह चाहती है कि इसे कुछ तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए तो मैं उपयुक्त प्राधिकारी से संपर्क करने का प्रयास करूँगा और लगभग 5 बजे मैं कुछ जानकारी दे सकूँगा।

माननीय उपाध्यक्ष : जी हाँ! माननीय सदस्य अपना भाषण जारी रख सकते हैं।

* सेठ गोविन्द दास : महोदय, मैं कह रहा था कि यह बहुत ही अच्छा होता यदि माननीय मंत्री जी ने इस समय इस विधेयक को प्रस्तुत नहीं किया होता। मैं जब यह कहता हूँ तो यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि मैं पुरानी प्रथाओं से चिपका रहना चाहता हूँ या मैं उन सभी चीजों का अनुसरण करना चाहता हूँ जो हमारी स्मृतियों और वेदों में दी गई हैं। मुझे संस्कृत का कुछ ज्ञान है और मैं अपनी भारतीय संस्कृति से प्यार करता हूँ, इसलिए जहाँ तक स्मृतियों और वेदों का प्रश्न है, प्रत्येक विषय पर उनका एक जैसा ही दृष्टिकोण नहीं है। यदि किसी खास विषय पर एक वेद या स्मृति में एक बार कही गई है तो उसी विषय पर दूसरे वेद या स्मृति में दूसरी बात कही गई है। हम सदैव ज्ञानपिपासु रहे हैं। हमारे इतिहास और संस्कृति में ज्ञान को पहला स्थान दिया गया है। हम इस तथ्य को स्वीकार कर चुके हैं कि काल भेदे धर्म भेदाय अर्थात् धर्म समय के अनुसार बदलता है। मैं स्वीकार करता हूँ कि हमें सुधारों की आवश्यकता है और सुधार विधानों के माध्यम से ही किए जाएंगे। मैं उन दिनों को स्मरण करता हूँ जब राजा राममोहन राय ने सती उन्मूलन के मामले की वकालत की थी। देश में उन दिनों भी ऐसे लोग थे जो सती प्रथा के समर्थक थे। मुझे वे दिन भी याद है जब ईश्वरचन्द्र विद्यासागर ने

* संसदीय वादः विवाद खंड- VIII, भाग- II, 7 फरवरी 1951, पृष्ठ- 2545-497