176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं सभा के विचारार्थ कुछ तथ्य रखना चाहता हूँ। ये तथ्य हैं कि विधान में डॉ. अम्बेडकर के द्वारा मांग की गई संशोधन प्रवर समिति के प्रतिवेदन से तात्विक रूप से भिन्न है कि हमें सामान्य न्याय के तहत इन संशोधनों को पुनः वितरित कराना चाहिए और देश का जनमत जानना चाहिए कि वे इसे उस रूप में जिसमें यह प्रस्तुत किया गया है रखना चाहते हैं या नहीं, और इसके लिए कोई समय नहीं है। इस सदन का विघटन होने वाला है। यह संभवतः कुछ ही महीनों के लिए है यदि कुछ असंभावित न घट जाए जिसकी युद्ध के कारण पूरी संभावना है। अब मैं अपनी महिला मित्रों और सुधारवादियों से कहता हूँ कि क्या उनके लिए कट्टरपंथियों की चुनौती को स्वीकार करना बेहतर नहीं होगा। श्री जसपत राय कपूर के संशोधन के अनुसार सिर्फ यही सवाल है कि इस अधिनियम के अंतर्गत आने और रहने के लिए लोगों का सहयोग पाने हेतु आप किस सीमा तक जा रहे हैं। चुनाव से अच्छा और कोई अवसर नहीं है। मतदान केन्द्रों पर देश की पूरी वयस्क जनसंख्या आएगी। यदि आपके पास मतदान केन्द्र में वोट डालने के साथ पंजीकरण लाने की व्यवस्था है तो मतदान केन्द्र में एक रजिस्टर रख दीजिए जिसके प्रत्येक वोटर इस संहिता को स्वीकार करने संबंधी अपनी इच्छा को अंगूठा का निशान लागकर व्यक्त कर देगा और इस प्रकार आप जनता का अधिदेश प्राप्त कर सकते हैं। तब आप कट्टरपंथ से लड़ सकते हैं और आइये तथा कहिए कि देश की अधिकाँश जनसंख्या इस सुधार को चाहती है, कट्टरपंथी को वापस जाना ही होगा और सुधारवादियों की उस दिन विजय होगी। लेकिन आप यह नहीं करते हैं। यदि आप जनता को अपने विचारों के अनुरूप गंभीरता से नहीं झाल सकते हैं तब आप क्यों जनता पर जिसका वह पालन कर रही है उसकी जगह पर तिरस्कार थोप रहे हैं और जिसे आप साबित नहीं कर सकते कि जनता यही चाहती है।
अतएव मैं सुझाव देता हूँ कि यदि माननीय विधि मंत्री मेरे माननीय मित्र श्री जसपत राय कपूर के संशोधन को उसी रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं तो उन्हें कम से कम हम लोगों के शरीयत के द्वारा स्थापित उदाहरण का अनुसरण करना चाहिए। जिसमें इसके कुछ भाग को सबों पर अनिवार्य रूप से प्रयोज्य बनाया गया है लेकिन कुछ भागों को केवल उन लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया है जो स्वयं आएंगे और अपने को पंजीकृत कराएंगे। यह दूसरा सुझाव है जो मैं माननीय मंत्री को देना चाहता हूँ।
श्री जे. आर. कपूर : क्या माननीय सदस्य बताने की कृपा करेंगे कि वे भाग कौन से हैं?
श्री हुसैन इमाम : मैं बताना चाहता हूँ कि कतिपय भाग हैं जिन पर घोर आपत्ति