हिंदू संहिता : जारी - Page 192

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की गई है, खास करके आपने आपत्ति की है। श्रीमान्, वह है पुत्री के लिए संपत्ति का वितरण। यदि आप चाहते हैं कि यह भाग सभी पर लागू नहीं होना चाहिए तो आप इसे इस तरह का प्रावधान बना सकते हैं, अर्थात् यह भाग-अध्याय 4 सिर्फ उन्हीं पर लागू होगा जो इसके अंतर्गत आना चाहते हैं।

संपत्ति के प्रश्न के संबंध में डॉ. अम्बेडकर के इस संशोधन से उत्पन्न गंभीर

खतरों की संभावना का उल्लेख भी करूँगा। मेरे खास मित्र पंडित ठाकुरदास भार्गव ने सुझाव दिया कि अविवाहित लड़कियों को संपत्ति में एक हिस्सा मिलना चाहिए और विवाहित स्त्री को श्वसुर के घर में पति की संपत्ति का हक मिलना चाहिए। लेकिन आपको तलाकशुदा स्त्रियों को नहीं भूलना चाहिए। आधुनिक मनु ने उनके लिए कैसे व्यवस्था की है? डॉ. अम्बेडकर ने तलाकशुदा स्त्रियों के लिए प्रावधान नहीं किया है जो अपने हिस्से से वंचित हैं। उन्होंने स्थायी तौर पर लड़कियों के लिए हिस्सा रखने का प्रावधान किया है - अविवाहित लड़की के लिए आधा हिस्सा और विवाहित स्त्री के लिए एक चौथाई हिस्सा। किंतु पंडित ठाकुरदास जी ने तलाकशुदा स्त्री के लिए कोई हिस्सा नहीं सुझाया है। डॉ. अम्बेडकर के कानून के मुताबिक उसे एक-चौथाई हिस्सा मिलता रहेगा। लेकिन पंडित ठाकुरदास जी उसे इस एक चौथाई हिस्से से भी वंचित कर देंगे क्योंकि विवाह होते ही उसका कोई हिस्सा नहीं रह जाएगा।

पंडित ठाकुरदास भार्गव : मेरे मुताबिक उसे नए पति की संपत्ति में हिस्सेदारी

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के अधिकार का हक होगा।

श्री हुसैन इमाम : यदि वह विवाह नहीं करती है? अतएव में सोचता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा किए गए प्रावधान- कि विवाहोत्तर स्त्री का संपत्ति के आधे हिस्से पर से अधिकार समाप्त हो जाएगा और वह पिता की संपत्ति का सिर्फ एक चौथाई की हकदार होगी - का दूसरा खतरा यह होगा कि वह अनैतिकता की ओर मार्ग प्रशस्त करेगा। एक धनाढ्य लड़की कभी भी गरीब लड़के से विवाह नहीं करेगी।

डॉ. अम्बेडकर : धनी की चिंता क्यों करते हैं?

श्री हुसैन इमाम : जब तक आप व्यवस्था को नहीं बदल देते हैं मेरे माननीय मित्र ब्रजेश्वर प्रसाद के विचार मास्को-पीकिंग धुरी तक नहीं जाते हैं तब तक और धन एवं पूँजी का ध्यान रखना है। जब आप उस दिन को पहुँच जाएंगे तो तब आपको इसकी चिंता करने की कोई जरूरत नहीं रहेगी।

मुझे विशेष आश्चर्य था कि डॉ. अम्बेडकर जो जन्म से प्रजातंत्रवादी हैं ने मतदाताओं के प्रति तिरस्कारपूर्ण टिप्पणी की होगी। मतदाता अपनी अज्ञानता