180 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्ष : सभा के समक्ष प्रवर समिति के प्रतिवेदन के अनुसार हिंदू विधि की कतिपय शाखाओं में संशोधन और इसे संहिताबद्ध करने हेतु विधेयक पर आगे चर्चा करना है। विधेयक का खंड दो चर्चा का विषय है।
श्री आर. के. चौधरी (असम) : मैं कुछ भी कहने और करने से पहले महोदय आपके माध्यम से मैं सत्यनिष्ठा से सभा से अपील करूँगा कि अनावश्यक उत्तेजना की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे बाध्य होकर कहना पड़ रहा है कि श्रीमती दुर्गाबाई के द्वारा अभी-अभी किया गया व्यवहार ऐसा नहीं है और यह....(व्यवधान)।
फिर मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या सरकार का ध्यान कल समाचार-पत्रों में छपे उस समाचार की ओर गया है कि यदि विधेयक पारित होता है, तो राष्ट्रपति अपनी सहमति से रोक सकते हैं और जहाँ तक....(व्यवधान)।
माननीय उपाध्यक्ष : कृपया शांत रहें।
श्रीमती दुर्गाबाई : चूँकि माननीय सदस्य ने मेरा उल्लेख किया है अतएव क्या मैं स्पष्टीकरण दे सकती हूँ?
माननीय उपाध्यक्ष : जब मैं बोल रहा हूँ तब नहीं....
श्रीमती दुर्गाबाई : आप मुझे माननीय सदस्य की बातों का उत्तर देने का अवसर अवश्य दें (व्यवधान)।
माननीय उपाध्यक्ष : शांति! शांति! मननीय सदस्य जिन्होंने दूसरे माननीय सदस्य को उत्तेजित नहीं होने की सलाह दी क्योंकि वह स्वयं ही उत्तेजित हैं। एक को दाहिनी ओर दूसरे को बायीं ओर बैठना चाहिए।
जहाँ तक राष्ट्रपति के उल्लेख का संबंध है इस विधेयक के वास्ते इस प्रकार या उस प्रकार उनका नाम नहीं प्रचारित किया जाना चाहिए। नियम 159 (छः) के अनुसार जब एक सदस्य बोल रहा है तो उसे चर्चा को प्रभावित करने के प्रयोजन से राष्ट्रपति का नाम नहीं लेना चाहिए। यहाँ राष्ट्रपति का नाम कदापि नहीं लिया जाना चाहिए।
श्री कामथ (मध्य प्रदेश) : व्यवस्था के प्रश्न पर नहीं अपितु शिष्टाचार के प्रश्न पर जब हिंदू संहिता जैसा विधान सदन के सामने है तो क्या माननीय विधि मंत्री के लिए इतना बड़ा पिटारा अपने सामने रखना उचित है?
श्री आर. के. चौधरी : सदन के समक्ष इतने गंभीर विषय के लिए यह उपयुक्त नहीं है। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या यह सच है कि राष्ट्रपति हिंदू संहिता पर इस सदन को संबोधित करेंगे।