हिंदू संहिता : जारी - Page 197

182 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरा व्यवस्था का प्रश्न पूर्व देशी रियासतों पर इस विधयक की प्रयोज्यता से संबंधित है जिनमें से कुछ अब भाग ‘ख’ राज्यों के रूप में जाने जानते हैं और कुछ भाग ‘क’ राज्यों में सम्मिलित कर लिए गए हैं। पूरा विषय इस प्रश्न की ओर है और मैं उस दिशा में सोच रहा हूँ।

माननीय सदस्य : व्यवस्था का प्रश्न क्या है?

पंडित मित्रा (पश्चिम बंगाल) : क्या माननीय सदस्य का प्रश्न यह है कि उन्हें विधेयक की जानकारी नहीं दी गई थी?

श्री नजीरुद्दीन अहमद : हाँ, इस विधेयक की जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी।

माननीय उपाध्यक्ष : मैंने व्यवस्था के प्रश्न को समझ लिया है।

10 बजे पूर्वाह्न

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मुझे कुछ तथ्य बताने हैं।

माननीय उपाध्यक्ष : जहाँ तक इस व्यवस्था के प्रश्न का संबंध है ‘‘कुछ तथ्य’’ आवश्यक नहीं हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : इस प्रश्न पर पीठ की व्यवस्थाएं हैं। मैं इस प्रश्न की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ जो 24 फरवरी 14 को श्री सरवटे के द्व ारा उठाया गया था।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य अच्छी तरह से जानते हैं कि इस विधेयक के प्रचालन का क्षेत्र या विस्तार खण्ड-1 से विनियमित है। खण्ड 1 (2) के अनुसार :

‘‘भारत के सभी प्रान्तों तक इसका विस्तार है।’’

व्यवस्था का प्रश्न यहाँ तक संगत हो सकता है कि क्या इस प्रतिबंधित तरीके से इसे स्वीकृति दी जोनी चाहिए या क्या, जैसा कि मूलरूप से यह तैयार किया गया था, संविधान के अन्तर्गत यह प्रयोज्य नहीं होना है। इसके पक्ष और विपक्ष में कई कारण हो सकते हैं, लेकिन व्यवस्था का प्रश्न इस स्थिति में उठाया जा सकता है इस स्थिति में नहीं। अब हम सामान्य विचार करने जा रहे हैं; यदि वे भाग ‘ख’ और भाग ‘ग’ राज्यों पर लागू नहीं होते हैं। तब खंड-1 पर चर्चा करते समय इस पर विचार करेंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : इससे सुविधा होगी, जो कि बाद में निश्चित तौर