हिंदू संहिता : जारी - Page 198

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पर आएगा। अतएव हमें इस समय तक प्रतीक्षा करने पर बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

माननीय उपाध्यक्ष : मैंने अपनी व्यवस्था दे दी है। माननीय सदस्य यह नहीं कहते कि यह खंड 2 किसी भी राज्य पर कदापि नहीं प्रयोज्य होगा; यदि पूरे भारत में किसी एक राज्य के छोटे से गाँव में भी यह लागू होता है तो हम खंड 2 पर विचार करेंगे। जब हम खंड 1 पर आते हैं तब हम संविधान के तहत इसे जहाँ नहीं प्रयोज्य होना चाहिए वहाँ बाकी सभी को समाप्त कर देंगे।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यही समस्या है। यदि राज्यों के सदस्य पहले से ही जानते हैं कि यह विधेयक उन पर लागू नहीं होगा, तो वे इस विषय को लेकर परेशान नहीं होंगे और चर्चा को सीमित किया जा सकेगा। लेकिन दूसरी ओर, यदि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती है कि क्या यह उन पर लागू होगा या नहीं, तो वे चर्चा में भाग लेंगे। अतएव, स्थिति को स्पष्ट करने के लिए हम जानना चाहते हैं कि हम कहाँ हैं और वे कहाँ हैं।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य अच्छी तरह जानते हैं कि अन्य सभी खंडों को खत्म करके हम खंड 1 पर आएंगे। कोई भी माननीय सदस्य जो राज्य के प्रतिनिधि हैं यह मानकर चल सकता है कि यह लागू होगा : वह ऐसा पहले राय के रूप में रख सकता है। फिर वह श्री नजीरुद्दीन अहमद के साथ इसे मालूम करने का प्रयास कर सकते हैं। पर्याप्त समय है।

श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार) : इससे पहले कि हम इस विधेयक पर चर्चा शुरू करें मैं समझता हूँ कि सभा को यह जानने का अधिकार है कि कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई है। समाचार-पत्रों से हमें पता चला कि विधेयक के सिर्फ दो भागों जो विवाह और तलाक से संबंधित हैं पर चर्चा की जाएगी। माननीय मंत्री जी के लिए स्थिति को स्पष्ट करना वांछनीय होगा जिससे कि सभा को पता चल सके कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं और अंततः किस तरह से इस पर फैसला लिया जाना है। श्रीमान्, यह एक विषय है जिसकी ओर मैं आपका और सभा का ध्यान दिलाना चाहता हूँ। दूसरी बात जिसकी ओर मैं आपका और माननीय मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहता हूँ वह यह है अब विधेयक इस तरह से प्रस्तुत किया जा रहा है कि इसे पहचानना मुश्किल है। वस्तुतः माननीय विधि मंत्री जो कि इस विधेयक के प्रस्तावक हैं, ने स्वयं को बड़ी संख्या में संशोधन भेजे हैं और उनमें से कुछ हमें कल तक प्राप्त हुए हैं। आप हिंदू संहिता जैसे इस विधेयक के महत्व को स्वीकार करेंगे। आपने इस सभा के सदस्यों के द्वारा इस संहिता के प्रति दिखाई गई गंभीरता को