हिंदू संहिता : जारी - Page 199

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भी देखा है। हम अकस्मात् ही यह देखकर अत्यन्त ही कठिन परिस्थिति में हैं कि ये संशोधन क्या हैं, इन संशोधनों के निहितार्थ क्या हैं और क्या संशोधनों के संशोधन जिसे डॉ. अम्बेडकर के संशोधन कह सकते हैं इसलिए भेजे जाने चाहिए कि चर्चा का मुख्य आधार बनेगा। हमारे सामने यही सब कठिनाइयाँ हैं। यह संहिता सदन में उपयुक्त तरीके से पारित हो सके और सभा का निर्णय अंततः ऐसा हो जिससे देश में इसकी प्रतिष्ठा बढ़े, इसलिए यह वांछनीय है कि कुछ समय दिया जाए जिससे कि इस संशोधनों को पढ़ा जा सके। श्रीमान्, आपको स्मरण होगा कि जब विधेयक पुनःस्थापित किया गया था और प्रवर समिति के पास भेजा गया था तो प्रवर समिति ने एक प्रतिवेदन दिया था। उसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने बड़ी संख्या में संशोधन भेजे। एक ओर हमारे पास ये संशोधन हैं तो, दूसरी ओर प्रवर समिति की रिपोर्ट है; अब ये संशोधन भी नहीं रह गए हैं - नए संशोधन भेजे जा चुके हैं। इन सबको संघटित करना और इस तरह से प्रस्तुत करना है कि उस पर सुविधापूर्वक विचार किया जा सके और इस पर संहिता के महत्व के मुताबिक विचार किया जाए। मैं सोचता हूँ कि हमें कोई प्रक्रिया अपनानी चाहिए जिससे इन संशोधनों पर सावधानी से विचार किया जा सकेगा। मैं विधि मंत्री से यह भी चाहूँगा कि वे सभी को बताएँ कि हिंदू संहिता के संबंध में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बाबत सरकार का सबसे हाल का फैसला क्या है?

श्री आर. के. चौधरी : मैं एक अन्य प्रश्न पूछना चाहता हॅँ जिससे कि इसका उत्तर इसके साथ दिया जा सके....

श्री बी. दास (उड़ीसा) : श्रीमान्, क्या मैं बोल सकता हूँ....

माननीय उपाध्यक्ष : और कुछ नहीं। जहाँ तक संशोधनों का संबंध है, माननीय विधि मंत्री ने सबसे पहले संशोधनों का एक सेट सभापटल पर रखा था और बाद में उन्होंने इन संशोधनों में संशोधनों का दूसरा सेट सभापटल पर रखा था। विधि मंत्री (डा. अम्बेडकर) : कुछ - मौखिक थे।

माननीय उपाध्यक्ष : वे सभी चूँकि अत्यन्त महत्वपूर्ण थे अतः उन्हें 5 सितम्बर को ही वितरित करा दिया गया है। लेकिन यदि कोई माननीय सदस्य चर्चा के दौरान किसी खास संशोधन में कोई संशोधन प्रस्तावित करता है, और यदि यह उपयुक्त है तो हम इस पर विचार करेंगे।

डॉ. अम्बेडकर : निःसंदेह, मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं यहाँ उन विषयों के मामले में अत्यधिक तकनीकी नहीं