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होने जा रहा हूँ ताकि कठिनाई हो। इतने पर भी, माननीय मंत्री जी कहते रहे कि वह इन समस्याओं का यथासंभव अधिक से अधिक सहमतिपूर्ण समाधान निकालना चाहेंगे। अतएव इस दिशा में सभा के सभी पक्षों के द्वारा सभी प्रयास किए जाएंगे। जहाँ तक किसी भी खंड का संबंध है इनके सहमतिपूर्ण समाधान के लिए पथ प्रशस्त दूर करने या स्थायी आदेशों को निलंबित करने में, यदि यह संभव हुआ, मैं कभी भी पीछे नहीं रहूँगा। माननीय सदस्यों को कोई कठिनाई नहीं होगी। किंतु एक बार फिर संशोधनां को एक साथ करने और उन्हें पुनः वितरित कराने कहां जहाँ तक प्रश्न है, माननीय सदस्य अच्छी तरह जानते हैं कि जहाँ तक जनप्रतिनिधित्व विधेयक का संबंध था हमारे पास संशोधनों का कितना विशाल अम्बार था; अध्यक्ष सभी संशोधनों के बारे में नहीं जान सकते थे। कई संशोधन स्वयं माननीय मंत्री जी को दिए गए थे। यह ऐसा सघन वन नहीं हैं जिसमें हम नहीं जा सकते। कुल मिलाकर मूल संशोधनों में कुछ संशोधन हैं और हम आगे बढ़ सकते हैं।
श्री श्यामनंदन सहाय : श्रीमान्, एक और निवेदन है।
माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य विधेयक पर आगे बढ़ने का फैसला करें।
श्री श्यामनंदन सहाय : यह फैसला हमने कर लिया है।
श्री बी. दास : क्या उन्हें पुनः बोलने की अनुमति दी गई है?
श्री श्यामनंदन सहाय : श्रीमान्, मैं एक और निवेदन करना चाहूँगा। हम लोग जिस प्रक्रिया का अनुसरण कर रहे हैं उसके द्वारा सबसे पहले सभी संशोधनों को रखा गया फिर उन पर एक साथ बहस हुई तथा निर्णय लिए गए। मैं यह कहूँगा कि हिंदू संहिता के मामले में वह संभव नहीं होगा क्योंकि अलग-अलग संशोधन की अर्थवत्ता अलग ही है; यहाँ प्रश्न कटौती प्रस्ताव या बजट मांगों पर बहस का नहीं है; यहाँ प्रश्न प्रत्येक संशोधन की अलग-अलग अर्थवत्ता और महत्व का है।
अतएव मैं निवेदन करूँगा कि हिंदू संहिता पर विचार के मामले में इन संशोधनों पर बारी-बारी से विचार किया जाए बहस भी की जाए और फिर उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का फैसला किया जाए। इसके बाद ही अगले संशोधन पर विचार किया जाए। मैं निवेदन करता हूँ कि इस विधेयक के संबंध में वही प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
श्री आर. के. चौधरी : क्या मैं सिर्फ एक सूचना के बारे में पूछ सकता हूँ? इस विधेयक पर पिछले फरवरी में हम लोगों ने चर्चा की थी जिसके बाद अब कतिपय संशोधनों को सभा पटल पर रखा गया है - ये उसके बाद से क्या पटल पर रखे गए नए संशोधन हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या जिन सदस्यों ने फरवरी में चर्चा में भाग लिया था वे अभी उन संशोधनों पर बोलने के हकदार होंगे या नहीं।