186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्ष : जब ऐसी स्थिति उत्पन्न होगी तब मैं इस सुझाव पर विचार करूँगा। जहाँ तक इन संशोधनों का संबंध है मैं ऐसा करने का प्रस्ताव करता हूॅँ। सामान्यतया प्रक्रिया यह है कि संशोधन एक-एक कर लिए जाते है, और उन्हें निपटाया जाता है और उसके बाद अगले संशोधन को लिया जाता है। लेकिन यहाँ, यदि संशोधन एक ही तरह के हैं, सिर्फ उनकी अभिव्यक्ति भिन्न-भिन्न हैं किंतु उनका सार एक ही है तो माननीय सदस्यों से कहूँगा कि वे उन सभी संशोधनों को इकट्ठे प्रस्तावित करें जिससे कि एक साथ ही चर्चा चल सके। वे संशोधन जिनके विषय भिन्न-भिन्न हैं, उन्हें मैं अलग-अलग रखूँगा। सहूलियत होती यदि माननीय मंत्री मुझे यह बताते कि क्या सभी संशोधन एक ही प्रकार के हैं; माननीय सदस्य भी जिस समय संशोधन पेश किए जा रहे हां इसके विषय पर विचार कर सकते हैं और यदि वे यह पाते हैं कि अन्य संशोधनों का सार एक ही प्रकार हैं तो भी खड़ा हो सकते हैं तथा उन्हें एक साथ पेश करने के लिए कह सकते हैं, और उन सभी पर एक साथ ही चर्चा चलेगी।
श्रीमती रेणुका राय (पश्चिम बंगाल) : यदि लोग चाहते हैं तो भाषणों की
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समय-सीमा तय हो सकती है।
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माननीय सदस्यगण : नहीं, नहीं।
बेहतर होगा कि वे वैसे संशोधनों को चुन लें जिनके सार एक ही हैं और उन संशोधनों को एक साथ चर्चा के लिए रखा जा सकता है। इससे समय की बचत होगी।
माननीय उपाध्यक्ष : मैंने भी यही कहा था। मेरे पास इतना समय नहीं है कि मैं स्वयं ही संशोधनों का समूह बना सकूँ। जैसे ही डॉ. अम्बेडकर के द्वारा संशोधन पेश किया जाता है मैं माननीय सदस्यों से पूछूँगा कि क्या उसी विषय पर उसी तरह के अन्य संशोधन हैं। यदि हैं तो मैं उन्हें एक साथ जोड़ दूँगा और उन पर एक साथ चर्चा होगी। वह कल के लिए है।
आज के लिए, हमें कार्यवाही शुरू करनी चाहिए। खंड 2 पर विचार हो रहा था।
श्रीमती रेणुका राय : श्रीमान् क्या आप मेरा सुझाव सभा के समक्ष रखेंगे?
श्री श्यामनंदन सहाय : जो प्रश्न मैंने उठाया है क्या उस पर माननीय मंत्री जी को कुछ नहीं कहना है?
माननीय उपाध्यक्ष : मैं नहीं सोचता कि वह कुछ भी करना चाहते हैं। क्या वह कुछ कहना चाहते हैं?