हिंदू संहिता : जारी - Page 202

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डॉ. अम्बेडकर : नहीं, श्रीमान्।

शिक्षा मंत्री (मौलाना आजाद) : प्रधान मंत्री इसे स्पष्ट करेंगे।

प्रधान मंत्री (श्री जवाहरलाल नेहरू) : मुझे खेद है कि जब माननीय सदस्य बोल रहे थे मैं यहाँ नहीं था।

माननीय उपाध्यक्ष : वह जानना चाहते हैं कि क्या इस विधेयक का कोई भाग है जिस पर चर्चा नहीं की जानी है। इससे पहले खंड 2 पर चर्चा हो रही थी और मैं चाहता था कि बहस शुरू हो और मैं संशोधनों को पेश करने की अनुमति देने ही वाला था। इसी बीच माननीय सदस्य ने जानना चाहा कि क्या माननीय मंत्री इस विधेयक के किसी खास भाग पर पहले चर्चा चाहते हैं और उन्हें अधिमानता दे रहे हैं।

श्री श्यामनंदन सहाय : समाचार-पत्रों में छपी रिपोर्टों की दृष्टि से मैं वस्तुस्थिति जानना चाहता था।

श्री जवाहरलाल नेहरू : मैं समझता हूँ कि परसों मैंने इसी विषय पर कुछ कहा था। वह यह है, कि हम लोग इस विधेयक के भाग-एक और भाग-दो पर विचार करना चाहते हैं और यदि समय रहेगा तो हम लोग बाकी पर भी विचार करेंगे। किसी भी हालत में, हम इन दो भागों के विषय को अधूरा नहीं छोड़ना चाहते हैं। हम लोग पहले उन्हें समाप्त करना चाहेंगे और शोध के साथ हम क्या करेंगे वह समय पर निर्भर करेगा।

श्री कामथ : क्या इस विधेयक पर चर्चा करने के लिए दिनों की निश्चित संख्या निर्धारित की गई है?

श्री जवाहरलाल नेहरू : हम उम्मीद करते हैं कि हम इस सप्ताह के अंदर चर्चा पूरी कर लेंगे।

श्री श्यामनंदन सहाय : इस महीना या इस सप्ताह?

श्री जवाहरलाल नेहरू : मैंने कहा, एक सप्ताह।

डॉ. अम्बेडकर : आपकी अनुमति से मैं सूची संख्या-1 में संशोधन संख्या-4 पेश करता हूँ। एक शेष खंड के साथ एकरूपता स्थापित करने हेतु ‘आदिवासी या समुदाय’ को प्रतिस्थापित करना चाहता हूँ। प्रस्ताव है कि :

भाग (1) के बाद जिसकी संख्या 3 हैं में मेरे द्वारा प्रस्तावित संशोधन में जोडि़ए :