हिंदू संहिता : जारी - Page 203

188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘भाग (ग) ( i ) में [(i क 9] ‘समुदाय’ को ‘आदिवासी या समुदाय’ से प्रतिस्थापित करेंः-

माननीय उपाध्यक्ष : संशोधन पेश किया गया। माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित शोधन, जो नं. 3 के भाग 1( i ) के बाद जोडि़एः-

‘‘भाग (ग) ( ii ) में ( i क) ‘समुदाय को ‘आदिवासी या समुदाय’ से प्रतिस्थापित कीजिए,’’

डॉ. अम्बेडकर ने संशोधन संख्या 3 को पिछले ही सत्र में प्रस्तुत कर दिया था। वह संशोधन और यह संशोधन सभा के सामने हैं। क्या इसी विषय से संबंधित संशोधन किसी दूसरे माननीय सदस्य का है? इसी विषय से संबंधित न कि पूरे खंड 2 से संबंधित?

श्री जे. आर. कपूर (उत्तर प्रदेश) : महोदय क्या आपका यह कहना है कि यदि

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डॉ. अम्बेडकर के संशोधन संख्या 3 और 4 में हमारा कोई संशोधन है तो हम उन्हें पेश कर सकते हैं? माननीय उपाध्यक्ष : जी हाँ।

श्री जे. आर. कपूर : अतएव, आपकी अनुमति से मैं पहले सूची संख्या-2 का संशोधन संख्या 95 रखना चाहता हूँ। सच तो यह है कि मैंने आपकी आरंभिक सूचना में इसे डॉ. अम्बेडकर की संशोधन संख्या 3 के संशोधन के रूप में दिया था किंतु यहाँ यह एक स्वतंत्र संशोधन के रूप में दिया गया है। संभवतः सुविधा की दृष्टि से कार्यालय ने ऐसा किया है कि मैं इसका हवाला सिर्फ इसलिए दे रहा हूँ कि मैं किसी भी आपत्ति से बच सकूँ कि संख्या 75 डॉ. अम्बेडकर के संशोधन में संशोधन नहीं है। प्रस्ताव है कि ( i ) खंड 2 के स्थान पर :-

‘‘2 संहिता की प्रयोज्यता - यह संहिता इंडिया अर्थात् भारत के सभी नागरिकों, जो वयस्क होने पर लिखित रूप में यह घोषणा करते हैं कि उन पर यह संहिता लागू होगी, और इस घोषणा को केन्द्र सरकार के इन प्रयोजनों के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकृत कराया गया हो, पर प्रयोज्य होगा :

बशर्तें कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग दो के प्रावधान सिर्फ उन घोषणाकर्ताओं पर प्रयोज्य होगा जब वर और वधू दोनों विवाह से पहले या पति और पत्नी दोनों विवाह के पश्चात् ऐसी घोषणा करते हैं।’’ तत्पश्चात् इसी संदर्भ में, मैं सूची संख्या 2 में संशोधन संख्या 97 प्रस्तुत करता हूँ, मेरा प्रस्ताव है कि :-