हिंदू संहिता : जारी - Page 204

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( ii ) माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा प्रसारित संशोधन संख्या 3 भाग (2) के बाद जोड़े :-

‘‘(3) उपखंड (3) के बाद निम्नलिखित नया उपखंड जोडि़ए अर्थात्’’

‘(4) यह संहिता या इसका कोई भाग या इसके कुछ भाग किसी दूसरे व्यक्ति जो वयस्क होने के पश्चात् लिखित घोषणा करता है कि यह संहिता या इसका कोई भाग या इसके कुछ भाग, जो भी स्थिति हो, उस पर लागू होंगे, और उस घोषणा को केन्द्रीय सरकार के द्वारा इस प्रयोजन के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकृत कराता है, उस पर भी प्रयोज्य होगी :

बशर्तें कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग दो के प्रावधान केवल उन्हीं घोषणा -कर्त्ताओं पर प्रयोज्य होगी जब वर और वधु दोनों ने विवाह के पूर्व या पति और पत्नी दोनों ने विवाह के बाद इस तरह की घोषणा कर दी है।’’

प्रस्ताव यह भी है :- ( iii ) माननीय डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन संख्या 3 खंड 2 के उपखंड (1) में प्रस्तावित संशोधन के भाग (1) ( ii ) में ‘‘सिख धर्म’’ के बाद जोड़े....

‘‘या किसी दूसरे धर्म या मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी धर्म को छोड़ कर किसी अन्य धर्म या पंथ।’’

( ii ) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग ग ( ii ) के बाद, जोडि़ए :-

‘‘( iii ) किसी भी अनाथ या परित्यक्त बालक जिसका भरण-पोषण राज्य करता है पर 8’’

श्री बी. के. पी. सिन्हा (बिहार) : क्या मैं यह सुझाव दे सकता हूँ कि माननीय

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सदस्यगण सभी संशोधनों को पढ़ने की बजाए केवल उनकी संख्या का उल्लेख कर सकते हैं। क्योंकि कभी-कभी संशोधन भाषण के समान होते हैं।

माननीय उपाध्यक्ष : यह ठीक नहीं है कि हम अपनी आँखें मूँद लें। इस तरह के सुझाव की सीमा है। संशोधनों को जरूर पढ़ा जाना चाहिए; हम इस तरह से तेजी से नहीं निपट सकते हैं। निश्चय ही मैं इस विषय पर उपयुक्त बहस की अनुमति दूँगा। कभी-कभी मैं स्वयं भी नहीं समझ पाता हूँ। केवल औपचारिक विषयों को छोड़ कर जब मैं माननीय सदस्यों से संशोधनों को नहीं पढ़ने के लिए कहूँगा, संशोधनों को जरूर पढ़ा जाए।

श्री जे.आर. कपूर : आपके निदेश के लिए धन्यवाद, श्रीमान्।