192 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्ष : इसी तरह का संशोधन पहले ही रखा जा चुका है।
श्री जे. आर. कपूर : यह मेरे अपने ही पहले के संशोधन में संशोधन है। तत्पश्चात् मैं अपनी संशोधन संख्या 125 रखना चाहता हूँ। प्रस्ताव है कि :-
( xi ) खंड 2 में परन्तुक जोडि़ए :-
‘‘प्रावधान है कि विवाह और तलाक और उत्तराधिकार से संबंधित भाग दो या और यात के प्रावधान किसी भी व्यक्ति पर भी तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि वह व्यक्ति, व्यस्क होने के बाद लिखित रूप से यह घोषणा नहीं कर देता है या कर देती है, जो भी स्थिति हो, कि वह उक्त प्रावधानों से शासित होगा और ऐसे घोषणा को इस प्रयोजन के लिए केन्द्र सरकार के निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकृत कराता है या कराती है :-
आगे प्रावधान है कि विवाह और तलाक से संबंधित भाग दो के प्रावधान केवल घोषणाकर्त्ताओं पर प्रयोज्य होगा जब वर और वधू दोनों विवाह से पूर्व, या पति और पत्नी विवाह के पश्चात् ऐसी घोषणा करते हैं।’’
अब केवल एक और संशोधन है जिसकी सूचना मैंने आज सुबह दे दी थी। यह एक लघु संशोधन है और आपकी अनुमति से मैं यह रखूँगा। प्रस्ताव है कि :-
( xii ) माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर के द्वारा प्रस्तावित संशोधन संख्या 3 खंड 2 के उपखंड (1) के प्रस्ताविक संशोधनों में भाग (1) ( ii ) के बाद, जोडि़ए :-
‘‘( iii ) एक नया भाग (ड.) जोडि़ए जो इस प्रकार है :-
‘(ड.) इस संहिता के लागू होने के पश्चात् किसी भी धर्म या पंथ में अंतरण करना।’
माननीय उपाध्यक्ष : अर्थात्, इस संहिता के लागू होने की तिथि को कोई हिंदू है, यदि वह भी संहिता के लागू होने के पश्चात् अपना धर्मान्तरण करता है तो उसके द्वारा धर्मान्तरण के बावजूद यही संहिता उस पर लागू होगी। क्या यहीं अभिप्राय है?
श्री जे. आर. कपूर : अभिप्राय यह है कि यदि कोई व्यक्ति, इस संहिता के लागू होने के बाद अपना धर्मान्तरण करता है तब यह संहिता उस पर लागू होगी। मान लीजिए एक हिंदू इस संहिता के कार्यान्वित होने के पश्चात् अपना धर्मान्तरण करता है और मुस्लिम बन जाता है, इसके बावजूद उसे अपनी इच्छानुसार दो, तीन या चार पत्नियाँ रखने की स्वतंत्रता नहीं होगी। अर्थात् इस संहिता के प्रावधानों से बचने के लिए और एक से अधिक पत्नी रखने के लिए कोई भी अपना धर्मान्तरण