194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
खंड 2 में, जहाँ कहीं भी ‘‘सिख’’ हो उसका लोप करें।
माननीय उपाध्यक्ष : प्रत्येक सोपान पर हमें जानना चाहिए कि संशोधन का आशय क्या है?
पंडित ठाकुरदास भार्गव : इस तरह का संशोधन पहले ही पेश किया जा चुका है। संशोधन संख्या 236 की विषय-वस्तु सरदार हुकम सिंह के संशोधन से ही मिलती-जुलती है।
माननीय उपाध्यक्ष : जो कुछ भी हो चुका है उसे हमें भूल जाना चाहिए। अब हम आरंभ करें। सभा का आशय एक खंड पर विचार करना और एक-दूसरे से संबद्ध तस्वीर प्रस्तुत करने का है - अतएव यदि ध्यान केंद्रित करने के लिए कुछ दोहराया जाए या इसे पुनः रखा जाए तो कोई नुकसान नहीं है।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : ऐसी स्थिति में मैंने फरवरी सत्र में एक संशोधन रखा था और इस पर वक्तव्य भी दिया था। क्या मेरे लिए आवश्यक है कि मैं इसे पुनः रखूँ?
माननीय उपाध्यक्ष : यह आवश्यक नहीं है?
डॉ. अम्बेडकर : नहीं, हम उन्हें जानते हैं।
श्री आर. के. चौधरी : क्या मैं आपका ध्यान संशोधन संख्या 123 की ओर दिला सकता हूँ? यह श्री झुनझुनवाला के नाम से है जो अभी-अभी यहाँ थे। किन्तु उन्होंने मुझसे आपका ध्यान दिलाने को कहा है क्योंकि जरूरी बुलावे पर यह सदन से बाहर गए हैं। इसलिए वह आएंगे और इसे देखेंगे।
माननीय उपाध्यक्ष : उन्हें आने दीजिए। वह आकर इसे रख सकते हैं।
श्रीमती रेणुका राय : आपने आज सुबह यह कह कर बड़ी कृपा की कि जिन संशोधनों के विषय-वस्तु समान हैं उन्हें एक साथ रखा जाना चाहिए। मैं आपसे पूछना चाहती हूँ कि क्या आप उन संशोधनों को पुनः रखने की अनुमति दे रहे हैं जो पहले रखे जा चुके हैं तथा जिन पर तीन दिनों तक बहस की गई थी। माननीय उपाध्यक्ष : वे लंबित हैं।
श्रीमती रेणुका राय : फरवरी सत्र में कतिपय संशोधन रखे गये थे और उन पर तीन या चार दिनों के लिए बहस भी हुई थी। मैं यह जानना चाहती हूँ कि क्या उनको अभी दोहराना है।