हिंदू संहिता : जारी खंड प्रति खंड चर्चा प्रवर समिति - Page 21

6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नहीं है। मेरे विचार से ये आम प्रकार की व्यवस्थाएँ हैं जिनका कानूनी रूप में कोई महत्व नहीं है। अनुच्छेद में आगे कहा गया है : ‘‘....सभी व्यक्तियों को समान रूप से धर्म के बारे में अंतश्चेतना और प्रदर्शन करने, मानने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता का अधिकार है।

जहाँ तक विवाह का सम्बन्ध है सभी कट्टर हिंदुओं का मानना है कि विवाह उनके धार्मिक पेशे और व्यवहार का हिस्सा हैं। जहाँ तक मैं जानता हूँ, हिंदू विवाह को धर्म का हिस्सा मानते हैं और अगर किसी व्यक्ति के कोई पुत्र नहीं है तो विश्वास किया जाता है कि वह नरक में जाता है।

श्री त्यागी : शांति! शांति! मेरे कोई पुत्र नहीं है।

माननीय अध्यक्ष : क्या माननीय सदस्य बैठेंगे? शांति! शांति! मैं चाहता हूँ कि

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माननीय सदस्य व्यवधान न डालें।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : किसी भी प्रकार के नरक से बचने के लिए मनुष्य का

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एक पुत्र होना आवश्यक है और उसके लिए शादी करना आवश्यक है। यह हिंदुओं के दस संस्कारों में से एक है। यह धार्मिक रीति है, और पुत्र प्राप्ति के लिए एक या अधिक पत्नियाँ हो सकती हैं। इसलिए मेरा कहना है कि यह व्यवस्था अनुच्छेद 25(1) में दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन करती है। मैं यह मुद्दा अकादमिक कारणों से नहीं उठा रहा हॅँ। बंबई हाईकोर्ट ने हाल ही में ‘‘द्विविवाह निवारक अधिनियम’’ में इस खंड का प्रयोग किया है जिसे कानून में अवैध घोषित किया है।

डॉ. अम्बेडकर : बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा मुझे पूरा यकीन है यह सही नहीं

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है। शायद किसी मजिस्ट्रेट ने किया होगा।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : हमारे सामने प्रश्न यह है कि क्या विवाह से सम्बन्धित

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कुछ प्रावधान संविधान के अधिकारातीत नहीं हो सकते। अनुच्छेद 15(1) के अनुसार अवैध या भेदभावपूर्ण भी हो सकते हैं। प्रश्न के कुछ छोटे पहलुओं के साथ बहुत से दूसरे अनुच्छेद भी हैं, पर मैं सोचता हूँ अभी दोनों पर्याप्त हैं। मैं इस सिद्धांत से भली प्रकार परिचित हूँ कि केवल किसी व्यवस्था की वैधता संदेहपूर्ण होने पर अध्यक्ष इसको नकार नहीं सकता। लेकिन ये वास्तव में बेकार के अड़ंगे हैं, मेरी आप से प्रार्थना है कि विधेयक की वैधता पर विचार करें। जैसा कि आप जानते हैं बहुत से कानून, विधेयक और धाराएँ अवैध घोषित की जा चुकी हैं। संविधान के पारित करने के समय भी आपत्तियाँ उठाई गई थीं कि इनको अवैध घोषित किया जा सकता है। हमने नैतिक अधिकार बनाए और उनके साथ कई असंगतियां होने