हिंदू संहिता : जारी - Page 211

196 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री बर्मन (पश्चिमी बंगाल) : प्रस्ताव है कि खंड 2 के उपखंड (2) के परन्तुक के अंत में लिखे गए ‘‘उन मामलों के संबंध में’’, के स्थान पर :

‘‘मामलों के संबंध में जिसका उस व्यक्ति ने स्वेच्छा से चयन नहीं किया है।’’

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य उसे हिंदू संहिता के दायरे में आने का एक विकल्प देना चाहते हैं।

डॉ. अम्बेडकर : कुछ उसी तरह का।

श्री बर्मन : मेरा आशय यह है कि एक व्यक्ति जिसमें स्वेच्छा से हिंदू विधि की प्रथाओं और रीतियों को स्वीकार करने का फैसला किया है उन्हें बाद में यह कहने की अनुमति नहीं होगी कि वह उनके द्वारा शासित नहीं होगा, लेकिन कोई भी तीसरा व्यक्ति चुनौती दे सकता है या प्रमाणित कर सकता है कि, उस व्यक्ति पर हिंदू संहिता लागू नहीं हो रही थी और इसलिए अन्य मामलों के संबंधों में संहिता उस पर लागू नहीं होती; लेकिन उन विषयों के मामले में जिसे उस व्यक्ति ने स्वयं ही स्वेच्छा से चयन किया है, अन्य व्यक्तियों को उसे चुनौती देने से रोका जाएगा।

माननीय उपाध्यक्ष : यदि उसने पहले ही चयन किया है कि उस पर हिंदू विधि का पहले का भाग लागू नहीं होगा। संभवतः माननीय सदस्य इसे और अधिक स्पष्ट करना चाहते हैं। श्री नजीरुद्दीन अहमद : प्रस्ताव है कि....

( i ) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ख) को हटाएं :-

( ii ) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (क), हिंदू, कहने का अभिप्राय है कि, सभी व्यक्ति जो हिंदू धर्म का पालन कर रहे हैं’’ के लिए ‘‘जो व्यक्ति जो धर्म से हिंदू है’’ स्थानापन्न हो।

माननीय उपाध्यक्ष : यह वही बात है जो माननीय मंत्री जी का संशोधन है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : शब्दों का परिवर्तन है। तत्पश्चात् प्रस्ताव है किः-

( iii ) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ख) के लिए स्थानापन्न-

‘‘(ख) कोई भी व्यक्ति जो धर्म से जैन है।’’

माननीय उपाध्यक्ष : यह एक वैकल्पिक संशोधन है। श्री नजीरुद्दीन अहमद : जी हाँ, महोदय।

तत्पश्चात् प्रस्ताव है कि :-

( iv ) खंड 2 के उपखंड (1) के भाग (ख) में