हिंदू संहिता : जारी - Page 212

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‘‘जैन या सिख’’ के लिए ‘‘या जैन’’ प्रतिस्थापित कीजिए।

माननीय उपाध्यक्ष : वह सिखों और बौद्धों को हटाना चाहते हैं। श्री नजीरुद्दीन अहमद : जी, महोदय।

डॉ. अम्बेडकर : विभिन्न प्रकार के संशोधन हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : उनमें से कुछ विकल्प के रूप में हैं।

श्री अम्बेडकर : एक संशोधन कहता है कि बौद्धों और सिखों को छोड़ देना चाहिए और इसका दूसरा संशोधन कहता है कि जैनों को छोड़ दीजिए।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य नहीं चाहते हैं कि जैनों को छोड़ दिया जाए।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : ‘जैन’ मैंने आपत्ति नहीं की है किन्तु सिखों ने घोर विरोध किया है।

माननीय उपाध्यक्ष : उन पर अब हिंदू विधि लागू होती है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : सारा प्रश्न यह है कि क्या इस तरह के हिंदू विधि को उन पर बलात लागू करना चाहिए? वे हिंदू हैं इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन क्या इस प्रकार के गैर-हिंदू विधि या वस्तुतः अहिंदु विधि उन पर बलात् थोपनी चाहिए?

तत्पश्चात्- प्रस्ताव है कि :-

( v ) खंड 2 के उप-खंड (1) के भाग (ग) ( i ) में ‘‘अवैध’’ के बाद जोडि़ए :-

‘‘जो, यदि वह 18 वर्ष की उम्र का हो गया है, स्वयं हिंदू है और’’

( vi ) खंड 2 के उप-खंड (1) के भाग ग ( i ) में ‘‘माता-पिता हैं’’ के बाद ‘‘या रहे हैं’’ जोडि़ए।

( vii ) खंड 2 के उप-खंड (1) के भाग (घ) में, अंत में जोडि़ए :-

‘‘उसके धर्मान्तरण से पूर्व उसके अधिकारों और दायित्वों के अधीन।’’

माननीय उपाध्यक्ष : मुझे यहाँ ठहरना चाहिए। हमें इसके निहितार्थ को समझना चाहिए। श्री जसपत राय कपूर चाहते हैं कि इस संहिता के पारित होने के पश्चात् एक हिंदू के द्वारा धर्म परिवर्तन करने पर भी उसके अधिकारों और दायित्वों को हिंदू संहिता के द्वारा ही विनियमित होना चाहिए। यह संशोधन चाहता है कि यदि