हिंदू संहिता : जारी - Page 214

199

रीतियों को जारी रखने की आवश्यकता नहीं है, तो यह विषय विचार के लिए है। (पूरी संहिता इस तरह से चल रही है मानों वे हिंदू समुदाय के नहीं हैं।)

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मेरी आपत्ति पूरी संहिता और इसके सभी भागों - अकेले तथा समवेत पर है।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य यह भूल जाते हैं कि समेकित भाग भी है; उनके संशोधनों से वे भाग भी जिन पर कोई आपत्ति नहीं की जा सकती, प्रयोज्य नहीं होगा। हम लोग केवल आरंभिक बहस कर रहे हैं जिसे माननीय सदस्य चाहते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : तत्पश्चात् प्रस्ताव है कि :-

( ix ) खंड 2 के उपखंड (2) का लोप कीजिए।

माननीय उपाध्यक्ष : यह अवशिष्ट संशोधन है। यह पूरी तरह से निरर्थक जाना पड़ता है। संहिता क्या है जिसे लागू होना चाहिए? भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम?

श्री नजीरुद्दीन अहमद : एक व्यक्ति हो सकता है जिसका धर्म नया हो। जापान में एक धर्म है जिसे शिंतोवाद के नाम से जाना जाता है। यदि उस धर्म को मानने वाला व्यक्ति भारत आता है तो आप हिंदू संहिता या मुस्लिम संहिता लागू करेंगे? उस पर तो उसकी अपनी संहिता लागू होनी चाहिए। परंतुक कहता है कि यदि वह ‘‘प्रमाणित’’ हो जाता है कि उस पर दूसरा कानून लागू होता है, तब हिंदू संहिता नहीं लागू होगी। यह दायित्व किस पर होगा? मान लीजिए कोई व्यक्ति भारत आता है जो कोई धर्म नहीं मानता है। उसके सिविल अधिकार और दायित्व हैं। क्या उस पर हिंदू संहिता लागू होगी? मुस्लिम संहिता या ईसाई संहिता या सिख संहिता उस पर क्यों नहीं लागू होगी? प्रत्येक व्यक्ति पर उसकी अपनी संहिता लागू होनी चाहिए। मैं इस परन्तुक को उपयुक्त समय पर स्पष्ट करूँगा। यह परन्तुक भी बहुत ही दीर्घसूत्री है। यह भारत आने वाले व्यक्ति, जिसका धर्म न तो मुस्लिम है, न ईसाई है, न पारसी है, और न ही यहूदी है, पर ही उसकी परिस्थिति प्रमाणित करने का दायित्व सौंपता है। वह यह कैसे प्रमाणित कर सकता है कि हिंदू संहिता उस पर लागू नहीं होती है?

माननीय उपाध्यक्ष : उस पर निजी अंतर्राष्ट्रीय विधि लागू होगी। सिर्फ इसलिए कि वह भारत आता है, हिंदू संहिता उस पर लागू नहीं होगी।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : मुद्दा यह है कि यह दायित्व विदेशी पर छोड़ दिया गया है जो अपने आपको अत्यन्त कठिनाई में डाल सकता है।