हिंदू संहिता : जारी - Page 216

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केवल उन क्षेत्रों या उन व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्गों पर उस समय से या उन चरणों में प्रयोज्य होगा जैसा कि राज्य विधानमंडल समय-समय पर अधिनियम बना कर प्रावधान करे।’’

माननीय उपाध्यक्ष : जहाँ तक इस संशोधन का प्रश्न है हमें इस बात पर विचार करना होगा कि क्या यह इस संशोधन पर विचार करने हेतु उपयुक्त स्थान होगा, या इसे.... चाहिए।

डॉ. अम्बेडकर : इसे खंड 1 के अन्तर्गत आना चाहिए।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : यदि आप सोचते हैं कि इस पर खंड 1 के साथ उपयुक्त रूप से विचार होगा....

माननीय उपाध्यक्ष : यह संशोधन स्थगित होता है और इस पर खंड 1 के साथ विचार किया जाएगा।

श्री झुनझुनवाला (बिहार) : प्रस्ताव है कि खंड 2 में परन्तुक जोडि़ए :-

‘‘फिर भी उपर्युक्त खंडों में किसी भी बात के सम्मिलित होने पर भी इस संहिता के प्रवर्तन के पाँच वर्षों के अंदर और अवयस्क के मामले में उसके वयस्क होने के पाँच वर्षों के अंदर, कोई भी व्यक्ति संसद द्वारा निर्धारित किसी भी प्राधिकारी के सामने और प्रक्रिया के अनुसार अपना नाम पंजीकृत नहीं कराएगा/कराएगी, पर यह संहिता प्रयोज्य नहीं होगी, बशर्तें कि वह इस संहिता के द्वारा शासित नहीं होना चाहता/चाहती है।’’

मैंने एक संशोधन रखा है जिसमें मैंने उन लोगों पर भार डाला था जो इस संहिता द्वारा शासित होना चाहते हैं वह स्वयं अपना पंजीकरण कराएं और यदि वह स्वीकार नहीं किया गया, तो मैंने यहाँ उन पर यह भार डाला है जो इस द्वारा शासित नहीं होना चाहते हैं।

श्री भट्ट : प्रस्ताव है कि :-

खंड 2 के उपखंड (3) ‘‘तथापि शासित’’ के बाद ‘‘या शासित होने की इच्छा’’ जोडि़ए।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं संशोधन को सभा के समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत करूँगा। जहाँ तक पिछले अवसर पर खंड 2 में प्रस्तावित संशोधनों का संबंध है, वे पहले ही सभा के समक्ष हैं। इसके बाद से सभी संशोधनों की चर्चा के आरंभ में रख दिया जाए, क्योंकि वे यदि चर्चा के जारी रहते हुए रखे जाते रहे, तो उन माननीय